हैप्पी लव लाइफ के लिए कल करें ये उपाय, रिश्ता बनेगा खूबसूरत

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Thursday, December 07, 2017-11:41 AM

कल शुक्रवार दि॰ 08.12.17 को पौष कृष्ण षष्ठी व अश्लेषा नक्षत्र होने के कारण देवी ललिता का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। देवी ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं। देवी भागवत के अनुसार देवी ललिता को ही आद्या शक्ति सती कहा जाता है। पिता दक्ष द्वारा अपमान से आहत होकर जब मां सती ने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए तो सती के वियोग में महेश्वर उनका पार्थिव शव अपने कंधों में उठाए चारों दिशाओं में घूमने लगे। इस महाविपत्ति को श्रीहरि के चक्र द्वारा सती के शव के 108 भागों में विभक्त कर दिया गया। इस प्रकार शव के टूकडे़ होने पर सती के शव के अंश जहां गिरे वहीं शक्तिपीठ की स्थापना हुई। उसी में एक मां ललिता का स्थान है। महेश्वर को हृदय में धारण करने पर सती नैमिषारण्य वन में लिंग धारिणी नाम से विख्यात हुईं इन्हें ललिता देवी के नाम से जाना जाता है। 


कालिका पुराण के अनुसार ललिता देवी की दो भुजाएं हैं, यह गौर वर्ण की तथा लाल कमल पर विराजित हैं। इनकी पूजा से समृद्धि की प्राप्त होती है। दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है। देवी ललिता की विधिवत पूजा से जीवन में सुख शांति आती है, अखंड समृद्धि बनी रहती व प्रेम में सफलता मिलती है।


पूजन विधि: संध्या के समय गुलाबी वस्त्र पर देवी ललिता का चित्र स्थापित कर उत्तरमुखी होकर विधिवत पूजन करें। घी का दीप करें, चंदन धूप करें, गुलाबी फूल चढ़ाएं, गुलाल चढ़ाएं, इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी सुहागन को भेंट करें।


पूजन मुहूर्त: शाम 17:25 से शाम 18:25 तक। 


पूजन मंत्र: ऐं ह्रीं श्रीं ललितायै नमः॥
 

उपाय
सुख-शांति हेतु देवी ललिता पर चढ़ा आटा किसी ब्राह्मणी को भेंट करें। 


अखंड समृद्धि हेतु देवी ललिता के समक्ष गौघृत का षडमुखी दीपक करें।


प्रेम में सफलता हेतु देवी ललिता पर भोग लगा दही-शहद सफेद गाय को खिलाएं।

 

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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