मकर संक्रांति: कई पीढ़ियों से चली आ रही दरिद्रता का करें नाश

  • मकर संक्रांति: कई पीढ़ियों से चली आ रही दरिद्रता का करें नाश
You Are HereDharm
Saturday, January 13, 2018-2:58 PM

हिन्दू काल गणना के अनुसार माघ महीने के शुरू में यानी जनवरी महीने के मध्य में सूर्य क्रमश: उत्तर दिशा की ओर उदय होने लगता है जो उत्तरायण कहलाता है। यह समय शुभ व मंगलकारी माना जाता है, इसीलिए इस दिन को भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार ‘मकर संक्रांति’ पर्व के रूप में मनाया जाता है। भारी ठंड के बावजूद लोग इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं व सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस मौके पर तिल-गुड़ के लड्डू व खिचड़ी दान देने तथा खाने का रिवाज है।


मकर-संक्रांति से जुड़ी मान्यताएं: एक प्राचीन कथा के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी किनारे सुव्रत नामक ब्राह्मण रहता था जो योग शास्त्र, ज्योतिष और तंत्र विद्या का ज्ञानी था। इतना सब कुछ होने के बावजूद वह अपनी विधाओं का प्रयोग धर्म व मानवता के प्रचार की बजाय धन कमाने के लिए करने लगा। जब वह बूढ़ा हुआ तो उसे ध्यान में आया कि मेरे मरने के बाद मेरे धन का क्या होगा? मैंने अपने परलोक को सुधारने के लिए कुछ भी नहीं किया, मेरा उद्धार कैसे होगा?


एक दिन चोरों ने उसका सारा धन चोरी कर लिया लेकिन सुव्रत जरा भी परेशान नहीं हुआ क्योंकि इस वक्त वह केवल अपने उद्धार के बारे में सोच रहा था। अचानक उसे शास्त्रों में लिखा याद आया कि यदि माघ माह में वह शीतल जल में डुबकी लगाता है तो पापमुक्त होने के साथ-साथ वह स्वर्गलोक को भी जाएगा। वह तुरंत नर्मदा में स्नान करने निकल पड़ा। वह नौ दिनों तक श्रद्धापूर्वक नर्मदा के जल में स्नान करता रहा व दसवें दिन मृत्यु को प्राप्त हो स्वर्गलोक को गया।


एक अन्य मान्यता के अनुसार इच्छा मृत्यु प्राप्त भीष्म पितामह ने 56 दिनों तक शरशैय्या पर पड़े रहना ही उचित समझा क्योंकि तब दक्षिणायन था और वह प्राण उत्तरायण में त्यागना चाहते थे। माघ माह की शुक्ल अष्टमी यानी सूर्य के उत्तरायण होने पर ही उन्होंने प्राण त्यागे थे।


मकर-संक्रांति पर्व की शुरूआत गुरु गोरखनाथ जी के द्वारा की गई बताई जाती है व गोरखनाथ मंदिर में इस दिन खिचड़ी मेला लगता है। कुछ भी कहें, मकर संक्रांति का पूरा दिन पुण्यकाल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी, दाल, वस्त्र दान, गुड़-तिल दान देने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों के अनुसार सूर्य उपासना से कई पीढिय़ों से चली आ रही दरिद्रता का नाश होता है। सूर्य से वर्षा, वर्षा से अन्न और अन्न से प्रजा का जन्म होता है यानी सूर्यदेव हमारे लिए अन्नदाता हैं जिनकी किरणें भोजन बनाने में सहायक हैं। मकर संक्रांति पर्व भगवान सूर्यदेव की पूजा व स्नान- दान का पर्व है जिससे सुख-समृद्धि, धन-धान्य व अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। 

अपना सही जीवनसंगी चुनिए| केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन

Recommended For You