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जब परफैक्शन पहुंच जाए पागलपन की सीमा तक, तो बन जाती है चिंता का कारण

  • जब परफैक्शन पहुंच जाए पागलपन की सीमा तक, तो बन जाती है चिंता का कारण
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Thursday, February 15, 2018-10:06 AM

हममें से कितने ही लोग ऐसे होते हैं, जो अपने काम के प्रति इतने गंभीर होते हैं कि काम में एक छोटी-सी गलती भी उन्हें सहन नहीं होती। यह बात बिल्कुल सही है कि हमें अपना काम सही तरीके से करना चाहिए, हमें अपने काम मेें सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए, किंतु यही बात जब हमें अस्वस्थ करने लगे या यह परफैक्शन पागलपन की सीमा तक पहुंच जाए, तब वह चिंता की बात बन जाती है।


मानसिक तनाव का सामना जो नहीं कर सकते, ऐसे लोगों में प्रमुख रूप से तीन गुण होते हैं-अतिकार्यक्षमता, अतिमहत्वाकांक्षा और सदा मन की सम्भ्रमित स्थिति। वे यही दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे हर चीज दूसरों से पहले कर सकते हैं। सिग्नल लाल होने से ठीक पहले ही ये लोग उसे पार करते हैं। लिफ्ट के लिए थोड़ी राह देखना भी उनके बस की बात नहीं होती। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे लोगों को जिम्मेदारी बांट लेना अच्छा नहीं लगता। इसलिए कंपनी में काम के लिए ये लोग आगे आकर जिम्मेदारी लेते तो हैं, लेकिन उन्हें टीमवर्क की आदत नहीं होती।


ऐसे लोग असफल होना बर्दाश्त नहीं कर सकते। एक नौकरी पर टिके रहना उनके स्वभाव में नहीं होता। वे नौकरियां बदलते रहते हैं। वे हमेशा यही कहते हैं कि काम का तनाव ज्यादा है, लेकिन सच्चाई यह होती है कि बॉस या अपने सहयोगियों के संबंध में इनके मन में नाराजगी छिपी रहती है। इन्हें हमेशा यह महसूस होता है कि ‘हम गलती कर रहे हैं, हम अपने आपसे भी दिल खोलकर बातें नहीं कर सकते।’ लेकिन वे यह कल्पना भी नहीं कर सकते कि अपने मन को समझाने के लिए समय देना जरूरी है या किसी दूसरे की सहायता लेना जरूरी है।


इसी कारण ये भावनात्मक दृष्टि से अशांत रहते हैं, अपनी बुद्धि व गुणों का पूरा प्रयोग भी नहीं कर पाते। हमें अब यही सोचना है कि क्या हम इनमें से एक हैं? नहीं हैं तो अच्छा ही है, किंतु अगर हैं तो हमें सोचना चाहिए कि कहीं इस आदत के कारण हम अपने परिवार, समाज या काम की जगह पर अकेले पड़ गए तो मानसिक तौर पर मुश्किल होगी। इसका असर हमारे शरीर पर भी होगा । इस खतरे को पहचानना जरूरी है।

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