धन, बंगला-गाड़ी की इच्छा कर सकती है आपको बर्बाद

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Monday, February 13, 2017-1:24 PM

एक बार एक शक्तिशाली राजा घने वन में शिकार खेल रहा था। अचानक मूसलाधार वर्षा होने लगी। अंधेरे में राजा अपने महल का रास्ता भूल गया और सिपाहियों से अलग हो गया। उसने वहां तीन बालकों को देखा। सुनो बच्चो! ‘जरा यहां आओ।’ 


राजा ने उनसे कहा, ‘‘क्या कहीं से थोड़ा भोजन और जल मिलेगा?’’


बालकों ने उत्तर दिया, ‘‘अवश्य।’’ 


राजा बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। मैं तुम सबकी सहायता करना चाहता हूं। एक बालक बोला, ‘‘मुझे धन चाहिए।’’


दूसरे बालक ने बड़े उत्साह से पूछा, ‘‘क्या आप मुझे एक बड़ा-सा बंगला और घोड़ागाड़ी देंगे?’’


राजा ने कहा, ‘‘अगर तुम्हें यही चाहिए तो तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी।’’


तीसरे बालक ने कहा, ‘‘मुझे न धन चाहिए, न ही बंगला-गाड़ी। मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए, जिससे मैं पढ़-लिख कर विद्वान बन सकूं और शिक्षा समाप्त होने पर मैं अपने देश की सेवा कर सकूं।’’


तीसरे बालक की इच्छा सुनकर राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसके लिए उत्तम शिक्षा का प्रबंध किया। वह परिश्रमी बालक था इसलिए दिन-रात एक करके उसने पढ़ाई की और बहुत बड़ा विद्वान बन गया। समय आने पर राजा ने उसे अपने राज्य में मंत्री पद पर नियुक्त कर लिया। अचानक राजा को वर्षों पहले घटी उस घटना की याद आई। उन्होंने मंत्री से कहा, ‘‘वर्षों पहले तुम्हारे साथ जो दो और बालक थे, अब उनका क्या हाल-चाल है।’’ 


मैं चाहता हूं कि एक बार फिर मैं एक साथ तुम तीनों से मिलूं। अत: कल अपने उन दोनों मित्रों को भोजन पर आमंत्रित कर लो। मंत्री ने दोनों को संदेश भिजवा दिया और अगले दिन सभी एक साथ राजा के सामने उपस्थित हो गए, ‘‘आज तुम तीनों को एक बार फिर साथ देख कर मैं बहुत प्रसन्न हूं। इनके बारे में तो मैं जानता हूं, पर तुम दोनों अपने बारे में बताओ।’’ 


राजा ने मंत्री के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। जिस बालक ने धन मांगा था वह दुखी होकर बोला, ‘‘राजा साहब,मैंने उस दिन आपसे धन मांग कर गलती की। इतना सारा धन पाकर मैं आलसी बन गया और बहुत सारा धन बेकार की चीजों में खर्च कर दिया, मेरा बहुत-सा धन चोरी भी हो गया और कुछ एक वर्षों में ही मैं वापस उसी स्थिति में पहुंच गया।’’


बंगला-गाड़ी मांगने वाला बालक भी अपना रोना रोने लगा, ‘‘महाराज, मैं बड़े ठाठ से अपने बंगले में रह रहा था, पर वर्षों पहले आई बाढ़ में मेरा सब कुछ बर्बाद हो गया और मैं भी अपने पहले जैसी स्थिति में पहुंच गया। 


राजा बोले, ‘‘धन-सम्पदा सदा हमारे पास नहीं रहते पर ज्ञान जीवन भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई चुरा भी नहीं सकता।’’   


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