इस गांव में हजारों साल से वर्जित है हनुमान जी की पूजा, जानिए क्यों?

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Thursday, October 27, 2016-10:16 AM

द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ प्रखण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर स्थित है। यह गांव करीब 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सदियों से हनुमानजी के पूजन पर रोक है क्योंकि हनुमानजी उस स्थान से संजीवनी पर्वत उठाकर ले गए थे। इस गांव में लाल रंग का झंडा लगाने पर भी पाबंदी है।

 

स्थानीय लोगों के अनुसार जब हनुमान बूटी लेने के लिए इस गांव में पहुंचे तो वे भ्रम में पड़ गए। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि किस पहाड़ पर संजीवनी बूटी हो सकती है। तब गांव में उन्हें एक वृद्ध महिला दिखाई दी। उन्होंने पूछा कि संजीवनी बूटी किस पर्वत पर होगी? वृद्धा ने द्रोणागिरि पर्वत की तरफ इशारा किया। हनुमान उड़कर पर्वत पर गए पर बूटी कहां होगी यह पता न कर सके। वे फिर गांव में उतरे और वृद्धा से बूटीवाली जगह पूछने लगे। जब वृद्धा ने बूटीवाला पर्वत दिखाया तो हनुमान ने उस पर्वत के काफी बड़े हिस्से को तोड़ा और पर्वत को लेकर उड़ते बने। कहा जाता है कि जिस वृद्धा ने हनुमान की मदद की थी उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। आज भी इस गांव के आराध्य देव पर्वत की विशेष पूजा पर लोग महिलाओं के हाथ का दिया नहीं खाते हैं और न ही महिलाएं इस पूजा में भाग लेती हैं।

 

श्रीलंका के सुदूर इलाके में श्रीपद नामक एक पर्वत है। माना जाता है कि यह वही पर्वत है, जिसे हनुमानजी संजीवनी बूटी के लिए उठाकर लंका ले गए थे। इस पर्वत को एडम्स पीक भी कहा जाता है। यह पहाड़ करीब  2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। श्रीलंका के लोग इसे रहुमाशाला कांडा कहते हैं। इस पर्वत पर एक मंदिर भी बना है। यह गांव  प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर है। माना जाता है कि इस गांव में कई चमत्कारी जड़ी-बूटियां भी है। कहा जाता है कि रामायण काल में जब लक्ष्मणजी को शक्तिबाण लगा और वे बेहोश हो गए, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने यहीं आए थे। रात के अंधेरे में जब संजीवनी बूटी चमक रही थी तब हनुमानजी उस पर्वत को यहां से ले गए। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण के प्राण तो बच गए लेकिन द्रोणागिरि गांव के लोग हनुमानजी से नाराज हो गए। पहले यहां के लोग इस पर्वत की पूजा करते थे लेकिन उस दिन से आज तक यहां हनुमानजी की पूजा पर पाबंदी है।


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