भक्त की भक्ति से प्रसन्न हो स्वयं चले आए थे भगवान श्रीकृष्ण

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Friday, October 14, 2016-9:27 AM

कर्नाटक के उडुपी गांव में भगवान श्रीकृष्ण का सुंदर मंदिर स्थित है। इस मंदिर के विषय में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए स्वयं ही खिड़की तक चले आते हैं। 

 

एक कथा के अनुसार यहां एक बार समुद्री तूफान आया। उस समय संत माधवाचार्य समुद्र के तट पर खड़े थे। उन्होंने देखा कि एक जहाज समुद्र में फंस गया है तो उन्होंने अपनी शक्तियों द्वारा उस जहाज को तट तक ले आए। जहाज पर बैठे लोगों ने उनका धन्यावाद किया अौर उन्हें श्रीकृष्ण अौर बलराम की दो प्रतिमाएं दी। संत ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को उडुपी में और भगवान बलराम की प्रतिमा को यहां से 5 कि.मी. दूर मालपी नामक स्थान पर स्थापित कर दिया। इस बलराम मंदिर को वदंबेदेश्वरा और उडुपी के कृष्ण मंदिर को कृष्ण मठ कहा जाता है।

 

कहा जाता है कि कनकदास नामक भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शनों हेतु यहां आया था। वह ब्रह्माण नहीं थी इसलिए उसे मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। उसने मंदिर की खिड़की के समीप खड़े होकर वहीं से भगवान के दर्शन करने का प्रयास किया। कनकदास की भक्ति देख भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्वयं वहां खिड़की तक आ गई अौर अपने भक्त को दर्शन दिए। 

 

उस समय से आज तक श्रीकृष्ण की प्रतिमा मंदिर में पीछे की ओर देखते हुई ही स्थापित है। भगवान की प्रतिमा जिस खिड़की के पास स्थित है उसे कनकाना किंदी कहा जाता है। इस खिड़की की मीनाकारी से सजावट की गई है। इस खिड़की में 9 छोटे-छोटे छेद हैं। कहा जाता है कि इनमें से अंदर देखने पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते हैं। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण की युवावस्था की भी एक सुंदर प्रतिमा है। इस प्रतिमा में श्रीकृष्ण दाएं हाथ में एक मथानी अौर बाएं हाथ में रस्सी पकड़े हुए हैं। 

 

कैसे पहुंचे
यहां पर हवाई, रेल अौर सड़क मार्ग द्वारा आया जा सकता है। मेंगलौर एयरपोर्ट उडुपी से करीब 50 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। वहां से बस अौर निजी वाहनों द्वारा मंदिर पहुंच सकते हैं। उडुपी के लिए देश के बड़े शहरों से रेलगाड़ियां भी आती है। 
 


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