‘भारत को सीरिया पर सैद्धांतिक रूख अपनाना चाहिए’

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Sunday, September 08, 2013-4:34 PM

लंदन: लंदन स्थित वी के कृष्णा मेनन इंस्टीट्यूट ने आज कहा कि भारत को अपनी तटस्थता की नीति को छोड़कर सीरिया पर सैद्धांतिक रूख अपनाना चाहिए ताकि सीरियाई जनता लोकतांत्रिक तरीक से अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भविष्य का फैसला कर सके।

संस्थान के कार्यकारी निदेशक साइरस मैपरेइल ने एक बयान में कहा, ‘वी के कृष्ण मेनन इंस्टीट्यूट भारत सरकार से अपील करता है कि वह अपनी तटस्थता की नीति को छोड़कर मांग करे कि असद सरकार समेत सभी पक्ष बल प्रयोग की बात छोड़ें और सीरियाई जनता को अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भविष्य का फैसला करने की अनुमति दें।’ उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में भारत की ऐतिहासिक नैतिक जिम्मेदारी बनती है।’

उन्होंने कहा कि भारत जो ‘कभी शांति का कड़ा समर्थक था और जो देशों द्वारा आक्रमण, शोषण और डराने धमकाने की नीति का धुर विरोधी रहा है , ऐसा लगता है कि वह सीरियाई मुद्दे पर अपने चरित्र के विपरीत खामोश है।’ मैपरेइल ने कहा, ‘यह हमें नेहरू मेनन सिद्धांत की याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बने किसी विवाद में शामिल सभी पक्षों को एक साथ वार्ता की मेज तक लेकर आओ।’

सीरियाई विपक्ष तथा पश्चिमी ताकतें राष्ट्रपति बशर अल असद पर 21 अगस्त को अपने ही लोगों के खिलाफ रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा रही हैं। इस आरोप का असद सरकार ने खंडन किया है। एक सप्ताह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरिया के खिलाफ सीमित सैन्य हमला करने के अपने फैसले की घोषणा की थी। अमेरिकी कांग्रेस में इस संबंध में एक प्रस्ताव पर इस सप्ताह बहस और मतदान होने की संभावना है।


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