वायु प्रदूषण से मधुमक्खियों की परागकण शक्ति कमजोर

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Friday, October 04, 2013-1:47 PM

लंदन: डीजल से निकलने वाले घातक तत्वों से मधुमक्खियों की सूंघने और स्मरण शक्ति तथा परागकण क्षमता कम हो रही है। वैज्ञानिक पत्रिका 'द नेचर' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के साऊथैम्पटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि डीजल से निकलने वाले धुंए का मधुमक्खियों की सूंघने तथा फूलों को पहचानने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

इस शोध में शामिल एक वैज्ञानिक ट्रेसी न्यूमैन ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण तथा धुंए से मधुमक्खियों की परागकण प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वर्ष 2011 में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार परागण करने वाले जीव जैसे तितली, भौंरा तथा अन्य अर्थव्यवस्था में 203 अरब डॉलर का योगदान करते हैं।

मधुमक्खियों पर पड़ते इस विपरीत प्रभाव के मद्देनजर यूरोपीय संघ के नेताओं ने गत अप्रैल में स्विटजरलैंड तथा जर्मनी द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले कीटनाशकों तथा अन्य रसायनों पर दो वर्षों का प्रतिबंध लगाने को कहा था।
 


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