चीन से बीडीसीए ‘पंचशील’ जैसी एक और बड़ी भूल साबित होगा: संघ

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Sunday, October 20, 2013-11:42 AM

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बीजिंग यात्रा के दौरान कथित तौर पर चीन की शर्तो और दबाव में किया जा रहा सीमा सुरक्षा सहयोग समझौता (बीडीसीए) ‘पंचशील’ जैसी एक और ‘बड़ी भूल’ साबित होगा।

संघ ने आगाह किया है, ‘‘ऐसा कोई समझौता करने से पहले भारत को चीन के असली इरादों के बारे में सोचना चाहिए। चीन के असली हित युद्ध में नहीं, बल्कि भारत को भौगोलिक रूप से घेरने और व्यापार की अपनी शर्ते थोपने मे है।’’

उसने सवाल किया है, ‘‘क्या संप्रग सरकार चीन की इस योजना से पूरी तरह निपट सकने में सक्षम है? जब भारत और चीन इस बारे में ही स्पष्ट नहीं हैं कि नियंत्रण रेखा कहां है, तो यह किस तरह का सीमा समझौता होगा?’’

संघ के मुखपत्र आर्गेनाइजऱ के ताजा अंक के संपाद्कीय में कहा गया है, ‘‘चीन अपनी शर्तों पर समझौता करने का भारत पर दबाव बना रहा है। भारत की जनता उम्मीद करती है कि हम एक और ‘‘पंचशील’’ जैसी बड़ी भूल की ओर नहीं बढ़ रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री रूस की यात्रा के बाद वहीं से 22 अक्तूबर को चीन यात्रा पर जाएंगे। उनके चीन प्रवास के दौरान बीडीसीए पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। बीडीसीए का उद्देश्य विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अक्सर दोनों देशों की सेनाओं के बीच आमने-सामने की स्थिति में आ जाने की घटनाओं से बचना है।

संपाद्कीय में कहा गया है कि चीन सीमा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है। वह कुछ वार्ता करके भारत पर दबाव बढ़ाने ,लेकिन विवाद को बनाए रखने की रणनीति पर चल रहा है। इससे चीन को अपनी रक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण करने और क्षेत्र में सड़कों का ढांचागत विस्तार करने में मदद मिल रही है।

इसमें कहा गया है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से दोनों में से किसी पक्ष ने आधिकारिक रूप से हिमालयी सीमा को मान्यता नहीं दी है और उसे ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ कहा जाता है। 1981 में सीमा वार्ता शुरू हुई लेकिन कई दौर की वार्ता के बाद भी शायद ही कोई प्रगति हुई हो। भारत के लिए अकसाई चिन मुख्य चिंता का विषय है तो चीन के लिए अरूणाचल प्रदेश, जिसे वह दक्षिण तिब्बत कहता है।

संघ ने कहा है कि चीन अरूणाचल प्रदेश को लेकर भारत पर दबाव बढ़ाता जा रहा है। इसके तहत उसने अरूणाचल प्रदेश में अपनी घुसपैठ की गतिविधियां बढ़ाने के साथ वहां के लोगों को नत्थी वीजा देने की रणनीति अपनाई है।


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