पढ़ें, क्यों रोका गया पाकिस्तान में थरूर का वीडियो संबोधन

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Wednesday, October 30, 2013-2:02 AM

इस्लामाबाद: केंद्रीय मंत्री शशि थरूर द्वारा भारत एवं पाकिस्तान के कारोबारियों को वीडियो के जरिए दिए जा रहे संबोधन को आज उस वक्त अचानक रोक दिया गया जब उन्होंने नियंत्ररण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान सरकार की आलोचना की।

यद्यपि इस कार्यक्रम को आर्थिक मोर्चे पर शांति से जुड़े कदम को बढ़ावा देने के मकसद से किया गया था, लेकिन मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने पाकिस्तान सरकार पर निशाना साधकर वहां मौजूद लोगों और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को चौंका दिया। थरूर ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ शिमला समझौते पर आधारित बातचीत के जरिए कश्मीर सहित सभी मुद्दों का समाधान करने को प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए आतंकवाद और हिंसा से मुक्त माहौल की जरूरत है।

उन्होंने पहले से रिकॉर्ड वीडियो में कहा, ‘‘पांच साल पहले मुंबई में हुआ आतंकवादी हमला और नियंत्रण रेखा पर हालिया घटनाएं पाकिस्तान के आधिकारिक बयान और सैन्य कार्रवाई में विरोधाभास को प्रदर्शित करती हैं।’’ थरूर ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए अपने संबोधन की शुरूआत की, लेकिन बाद में कड़ा रूख अख्तियार किया और इसका सुझाव दिया कि पाकिस्तान सरकार को क्या करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर यहां शांति के प्रयास को लेकर अधिक इच्छा होगी तो इससे स्थानीय स्तर पर पैदा हुए आतंकवादियों का सामना कर रही पाकिस्तान सरकार को मदद मिलेगी क्योंकि वे पड़ोसियों के यहां आतंकवाद का निर्यात करते हैं।’’ थरूर ने कहा, ‘‘पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था जिस दिन वास्तव में आतंकवाद को सरकारी नीति के औजार बनाना छोड़ देगी तो उसके साथ ही इस उपमहाद्वीप में शांति के नए सेवेरे की उम्मीद जग जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कुछ आतंकवादियों को ही निशाना बनाने की गलत नीति पर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से अमल कर रहा है और चरमपंथी सक्रिय रूप से दूसरों की मदद कर रहे हैं।

जिन्ना सभागार में आयोजित कार्यक्रम में थरूर ने कहा कि पाकिस्तान की तरह भारत की सेना विदेश नीति नहीं बनाती है क्योंकि यह काम निर्वाचित असैन्य सरकार का है जो संवाद से जुडऩे को प्रतिबद्ध है। उनके भाषण के दौरान वहां का माहौल तनावपूर्ण होने लगा और ऐसे में अचानक वीडियो को कट कर दिया गया। वहां मौजूद लोगों ने 22 भारतीय प्रतिनिधिमंडल और भारतीय उच्चायोग के अधिकारी शामिल थे। थरूर ने कहा कि पाकिस्तान की आतंकवाद से निपटने की नीति उसकी आंतरिक सुरक्षा को कमतर कर रही है तथा पड़ोस में शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है।

उन्होंने कहा, पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान को यह गंभीरता के स्वीकार करने की जरूरत है कि जिन्होंने मुंबई में ताज होटल पर हमला किया वे भी उसी तरह उनके दुश्मन हैं जैसे इस्लामाबाद में मैरियट होटल पर हमला करने वाले आतंकवादी उनके दुश्मन हैं। कार्यकम का आयोजन करने वाले संगठन इस्लामाबाद चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख शाबान खालिद ने कहा कि माहौल कड़वाहट भरा हो गया क्योंकि शांति के इस मंच का इस्तेमाल ‘राजनीतिक भाषणों’ के लिए किया गया।

बाद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि सरकार की जो भी स्थिति हो, लेकिन नौजवान कारोबारी पाकिस्तान में शांति को बढ़ावा देने के लिए आए हैं। इसका तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ स्वागत किया गया। वीडियो कट किए जाने से पहले थरूर ने कहा कि भारत इन दलीलों को स्वीकार नहीं करता है कि नियंत्रण रेखा पर आक्रमकता अथवा अकारण गोलीबारी की घटनाओं के पीछे सरकार से इतर तत्वों का हाथ है।

उन्होंने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा पर सबकुछ दोनों पक्षों की सेना के हाथ में है।’’ थरूर ने कहा कि यह बात भारत को परेशान करती है कि पाकिस्तान सरकार अपनी सरजमीं से पैदा होने वाले आतंकवादियों एवं कथित सरकार से इतर तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने में अक्षम है या फिर अनिच्छुक है। थरूर ने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी हाल के कुछ सप्ताह के दौरान बढ़ गई है और इनके लिए सरकार से इतर तत्वों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।’’
 
उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के सात अभियुक्तों के खिलाफ पाकिस्तान में जांच और सुनवाई में प्र्रगति एक ऐसा महत्वपूर्ण कदम है जिसके आधार पर भारत पाकिस्तान की अपनी सरजमीं पर आतंकवाद का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता की परख करेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘इस मामले की गति काफी धीमी रही है। वकीलों की गैरमैजूदगी और अभियोजन पक्ष के वकीलों के बार बार बदले जाने से सुनवाई कई बार स्थगित होती रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान को मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को जल्द न्याय की जद में लाने में ठोस प्रगति दिखानी होगी।’’

पाकिस्तान से निरंतर पैदा होने वाला आतंकवाद भारत के लिए चिंता की मुख्य वजह बना हुआ है और यह पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है कि इस्लामाबाद सभी आतंकी नेटवर्क, संगठनों एवं ढांचे को खत्म करने के लिए प्रतिबद्धित कदम उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान को नियंत्रणरेखा की गरिमा को बरकरार रखना चाहिए जो दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का सबसे महत्वपूर्ण कदम है। हमारी चौकियों पर अकारण गोलीबारी तथा नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की आक्रमकता को खत्म करना इनमें शामिल है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की पैरवी की।


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