मेहसूद की हत्या से पाक-अमेरिका में तनाव

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Monday, November 04, 2013-1:19 PM

पेशावर: एक बार फिर पाकिस्तान सरकार तालिबान के दबाव में आ गई है। तालिबान मुखिया हकीमुल्ला मेहसूद के अमेरिकी ड्रोन हमले में माने जाने के बाद पाकिस्तान में राजनीति गरमा गई है। हालात इतने खराब हो गए कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को कैबिनेट की इमरजेंसी मीटिंग बुलानी पड़ी। मेहसूद की हत्या को सुरक्षा मामलों की इस कैबिनेट मीटिंग में पाकिस्तान ने अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है।अमेरिकी द्वारा की कार्रवाई को पाक सरकार ने तालिबान के साथ होने वाली की बातचीत में बाधा डालना बताया है।

ड्रोन हमलों पर तीखे तेवर दिखाते हुए पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया है।पाक ने अमेरिका पर आतंकवादियों के साथ शांति वार्ता में बांधा पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग की समीक्षा होगी। पाकिस्तान के  गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान से जब पूछा गया कि क्या अमेरिका ने तालिबान के साथ शांति वार्ता को नुकसान पहुंचाने के लिए यह हमला किया तो खान ने कहा, निश्चित तौर पर।

उनका कहना है कि हकीमुल्ला की हत्या का अर्थ, तालिबान से साथ किए जा रहे शांति प्रयासों की हत्या है। महसूद अचानक इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया? अगर वह वांछित था तो पहले भी कई मौके आए थे। यह हमला उस समय क्यों किया गया जब तीन दिन बाद ही उलमा का तीन सदस्यीय दल दौरा करने और तालिबान के साथ औपचारिक संपर्क स्थापित करने जा रहा था। जबकि अमेरिका पाकिस्तान के उलट तालिबान के प्रमुख हकीमुल्ला महसूद की मौत को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मान रहा है।

हेरिटेज फाउंडेशन की वरिष्ठ शोधकर्ता लीसा कर्टिस ने कहा कि मेहसूद की मौत अमेरिका के लिए बड़ी सफलता है। 2007 में तालिबान ने अपने गठन के बाद से पाक में आतंकवादी हमले करके हजारों लोगों की जान ली। न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि महसूद की मौत से सीआईए के इस कार्यक्रम की जरूरत लोगों के सामने आ गई।

वॉशिंगटन पोस्ट ने इस पर सहमति जाहिर करते हुए कहा कि पूर्वी अफगानिस्तान में 2009 में सीआईए की एक चौकी पर हुए हमले में सात अमेरिकी अधिकारियों की मौत हुई थी। इसका जिम्मेदार महसूद ही था। एक समय पाकिस्तान के मानवाधिकार समूह और संयुक्त राष्ट्र में इन ड्रोन हमलों की आलोचना बहुत अधिक होने लगी थी, क्योंकि इनमें नागरिकों की मौतें हो रही थीं।

 


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