मॉरीशस ने किया चोगम सम्मेलन का बहिष्कार

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Saturday, November 16, 2013-10:20 AM

लंदन: मॉरीशस वर्ष 2015 में होने वाले अगले चोगम  सम्मेलन की मेजबानी नहीं करेगा। मॉरिशस का वर्ष 2015 के चोगम सम्मेलन की मेजबानी करना पूर्वनियोजित था, लेकिन इस सप्ताह श्रीलंका में हुए चोगम सम्मेलन के बहिष्कार के कारण अब वह इसकी मेजबानी नहीं करेगा। मॉरीशस के राष्ट्रपति नवीन चंद्र रामगुलाम ने ब्रिटिश टेलीविजन को इस बात की जानकारी दी।

रामगुलाम ने कल कोलंबों में हो रहे राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक (चोगम) के बहिष्कार करने के अपने निर्णय को सही बताया और कहा कि श्रीलंका में जातीय संघर्ष के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में ‘‘जवाबदेही का अभाव है’’। बहरहाल उन्होंने यह भी कहा कि उनके बहिष्कार के कारण मॉरीशस अब अगले दो सालों तक चोगम का आयोजन नहीं करेगा।

रामगुल ने बताया, ‘‘परंपरा यही है कि जिस देश के राष्ट्राध्यक्ष चोगम की मेजबानी करना चाहते हैं, उन्हें चोगम सम्मेलन का आयोजन कर रहे देश में उपस्थित होना चाहिए। इसलिए मैंने मेरे विदेश मंत्री को कहा कि मैं श्रीलंका में चोगम सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं आ सकता, क्योंकि मैं रीतियों या परंपराओं को तोडऩा नहीं चाहता था। वर्ष 2015 के चोगम सम्मेलन की मेजबानी कोई भी राष्ट्र कर सकता है। मैंने चोगम से अपना नाम वापस ले लिया है।’’

श्रीलंका पर वर्ष 2009 में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ युद्ध में तमिल-अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के चलते भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों ने भी कोलंबो में चोगम सम्मेलन में भाग नहीं लिया।
 


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