मालदीवः विवादित राष्ट्रपति चुनाव में 50 फीसदी से अधिक मतदान

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Saturday, November 16, 2013-10:54 PM

माले: कई महीनें की राजनैतिक अस्थिरता को खत्म करने के वैश्विक दबाव के बीच मालदीव के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में 50 फीसदी से अधिक लोगों ने मतदान किया। इस चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला यामीन के बीच कड़ा मुकाबला है।

निर्वाचन आयोग के प्रमुख फव्वाद तौफीक ने कहा कि राष्ट्रपति चुनावों के आधिकारिक नतीजों की घोषणा कल की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक नतीजे मध्यरात्रि से पहले घोषित कर दिए जाएंगे। संवैधानिक संकट के बीच एक नया राष्ट्रपति चुनने के लिए काफी देर से हुए इन चुनावों के दूसरे चरण का मतदान सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुआ। मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की कतारें देखी जा सकती थीं। फव्वाद ने लोगों से लंबी कतारों के बावजूद धैर्यवान बने रहने की अपील की। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि यदि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की शिकायत के लिए वे आयोग के शिकायत ब्यूरो का इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव्स के नेता यामीन ने रद्द किए गए चुनावों से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा वोट लेते हुए कुल 30.3 प्रतिशत वोट हासिल किए। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग की ओर से 10 नवंबर के लिए घोषित चुनावों को उच्चतम न्यायालय ने आज तक के लिए स्थगित कर दिया था। मतदान करने के बाद यामीन ने कहा कि वे चुनाव के नतीजों को स्वीकार करेगे और उन्होंने 55 से 60 प्रतिशत वोटों के साथ जीत की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत विश्वास के साथ वोट डालने आया हूं क्योंकि हमारा गठबंधन बहुत बड़ा है। एमडीपी के अलावा सभी अन्य राजनैतिक दल और नेता हमारे साथ हैं।’’

यामीन के हवाले से समाचार पोर्टल हावीरू ने कहा, ‘‘लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव में ज्यादा अनियमितताएं नहीं होंगी। हम मतदान के नतीजों को स्वीकार करेंगे।’’ नशीद ने भी अपना वोट डाला। एक रैली में कल नशीद ने कहा, ‘‘ईश्वर ने चाहा तो हम मालदीव में दोबारा लोगों की सरकार बनाएंगे। मालदीव के नागरिकों की उम्मीदें सच होंगी। हम नागरिकों की सरकार बनाएंगे। यह एक ऐसी सरकार होगी जो आप बनाएंगे।’’ फरवरी 2012 में दबाव में आकर नशीद के इस्तीफा दे देने के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद ने कार्यभार संभाला था।

बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना करते हुए वहीद ने कल पद त्यागते हुए देश छोड़ दिया। उन्होंने पहले कहा था कि वे 10 नवंबर को कार्यकाल खत्म होने के बाद भी तब तक बने रहेंगे, जब तक उनका कोई उत्तराधिकारी शपथ नहीं ले लेता। बीते बुधवार को मालदीव को राष्ट्रमंडल मंत्रीस्तरीय कार्य समूह से निष्कासित कर दिया गया था। देश के राष्ट्रपति चुनावों को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय के बार-बार हस्तक्षेप के बाद राजनैतिक अव्यवस्था की जांच यह समूह कर रहा है। एक बार नतीजों और दो बार चुनावों को खारिज किए जाने के बाद चुनाव में हो रही देर को विदेशी कूटनीतिज्ञ राजनैतिक रूप से प्रेरित मानते हैं। आज के चुनाव के विफल रहने पर यूरोपीय संघ ने ‘उचित कार्रवाई’ की चेतावनी दी है


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