जरदारी की जीभ काटने का मामला, आरोपियों को ईसीएल से हटाया

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Saturday, November 30, 2013-3:44 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तानी सरकार ने सिंध पुलिस के उन दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों के नाम निकास नियंत्रण सूची (ईसीएल) से निकाल दिए हैं, जो वर्ष 1999 में देश के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को प्रताडि़त करने, जीभ को चोटिल करने और उन्हें घायल करने के आरोपी हैं।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने आज बताया कि सिंध के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक राणा मकबूल और उप पुलिस महानिरीक्षक फारूक अमीन कुरैशी को ईसीएल सूची से निकालने से दोनों विदेश यात्रा कर सकेंगे। दोनों पूर्व पुलिस अधिकारियों पर उस समय हुई ‘‘कठोर पूछताछ’’ के दौरान जरदारी की जीभ चोटिल करने का आरोप है, जब नवाज शरीफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्हें जेल में बंद किया गया था।

मकबूल ने स्वयं को जेल में चोटिल करने के लिए जरदारी के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया है। समाचार पत्र ने कहा कि परवेज मुशर्रफ ने जब 1999 में नवाज सरकार का तख्तापलट किया था, तब तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक मकबूल को शरीफ और उनके सहयोगियों के साथ विमान अपहरण मामले में फंसाया गया था।

वर्ष 2008 में जब जरदारी राष्ट्रपति बने तब उनकी जीभ चोटिल का मामला सक्रिय हुआ, लेकिन मकबूल और कुरैशी पीएमएल-एन की छत्रछाया में पंजाब में रहे और अपनी जान को खतरा बताते हुए अदालत में किसी भी सुनवाई के लिए आने से इनकार कर दिया। पीपीपी सरकार के गृह मंत्री रहमान मलिक ने उन दोनों व्यक्तियों के नाम ईसीएल पर डाले थे। अब पीएमएल-एन सरकार के गृह मंत्री चौधरी निसार ने दोनों के नाम ईसीएल से हटाने के निर्देश दिए।

मामले में प्राथमिकी वर्ष 2005 में दर्ज की गई थी। जरदारी ने पुलिस में दी गई अर्जी में कहा था कि इन लोगों ने ‘‘सरकार के इशारे पर मुझे प्रताडि़त किया और मेरी हत्या करने का प्रयास किया।’’ जरदारी ने कहा था कि 1999 में उन्हें जेल से एक पूछताछ स्थल ले जाया गया था। जहां उन्हें हत्या के इरादे से हिरासत में प्रताडि़त किया गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनकी जीभ चोटिल कर दी गई।


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