यासुकुनी युद्ध स्मारक में आबे के जाने से ड्रैगन हुआ लाल

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Thursday, December 26, 2013-2:36 PM

टोक्यो: चीन और दक्षिण कोरिया से जारी विवाद के बीच आज जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के यासुकुनी युद्व स्मारक के दौरे ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। आबे के इस कदम से उसके पड़ोसी देश सख्त नाराज हैं। इससे पहले भी जब कभी जापान के प्रधामंत्रियों या किसी महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने यासुकुनी युद्व स्मारक का दौरा किया है, तब- तब चीन और दक्षिण कोरिया ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

1867 के बोशिन युद्ध से द्वितीय विश्व युद्ध तक जापान के लिए युद्व भूमि में मारे गए सैनिकों के सम्मान में बने यासुकुनी युद्ध स्मारक का दौरा इससे पहले 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुनिशिरो कोइजुमी ने किया था। तब दक्षिण कोरिया और चीन ने काफी बवाल मचाया था। उनका कहना है कि यह युद्ध स्मारक शहीदों के अलावा उनको भी श्रृद्धांजलि देता है,  जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के युद्ध अपराधी घोषित करते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद जापान के कोई भी प्रधानमंत्री चीन और दक्षिण कोरिया से अपने संबंध सुधारने के इरादे से युद्ध स्मारक नहीं गए। लेकिन बीते साल से जापान और चीन तथा जापान और दक्षिण कोरिया के संबंधों में अलग-अलग द्वीपों के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है।
आबे भी 2006 से 2007 के अपने पहले कार्यकाल में यासुकुनी युद्ध स्मारक नहीं गए, लेकिन उन्होंने बाद में कई बार इसके लिए अफसोस जाहिर किया। इस बार अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने अपनी इच्छा पूरी की और टेलीविजन पर उनके इस दौरे का आज सीधा प्रसारण किया गया।

आबे ने कहा है कि उन्हें आश्चर्य है कि अब भी इस दौरे पर आपत्तियां दर्ज होती हैं। उन्होंने कहा, "मेरा दौरा चीन और दक्षिण कोरिया की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं है। हम अपने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और हम अपने प्रण पर अटल हैं कि हम युद्ध नहीं करेंगे और अपने लोगों को युद्ध की त्रासदी से दोबारा नहीं गुजरने देंगे।"

उधर चीन ने आबे की इस दौरे को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जापान को इसके परिणामों को भुगतना होगा। चीन ने जापान के राजदूत को बुलाकर उनके समक्ष इसके लिए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा, "आबे के इस दौरे से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों के अत्याचार के शिकार हुए चीन और अन्य एशियाई देशों के नागरिकों की भावना आहत हुई है।"

शहीद सैनिकों के लिए समर्पित यासुकुनी में द्वितीय विश्व युद्ध के कम से कम 14 युद्ध अपराधियों को भी श्रद्धांजलि भी दी गई है। इन युद्ध अपराधियों में पर्ल हार्बर पर हमले का आदेश देने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री जनरल हिदेकी तोजो भी शामिल हैं।

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