भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए चुनौतीपूर्ण समय

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Wednesday, January 01, 2014-11:29 AM

वाशिंगटन : जाता हुआ साल 2013 दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रिश्तों में आए गतिरोध के लिए याद किया जाएगा जिनमें एक विवाद अमेरिका में भारत की एक राजनयिक की गिरफ्तारी और उनके साथ बदसलूकी से जुड़ा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ इसी साल सफल मुलाकात की थी और उपराष्ट्रपति जो बायडेन ने भारत का दुर्लभ दौरा किया लेकिन द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव साल भर देखा गया जिनमें खासतौर पर भारत के परमाणु जवाबदेही कानून को लेकर उठे मतभेद प्रमुख थे।

200 से अधिक अमेरिकी सांसदों ने इसी साल भारत की आर्थिक नीतियों के खिलाफ अभूतपूर्व तरीके से गुस्सा जाहिर किया। हालांकि साल के समाप्त होते होते देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी का मामला सामने आया। वीजा धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार की गयीं उप महावाणिज्यदूत देवयानी की गिरफ्तारी के संबंध में अमेरिका ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करके वे अपने देश के कानून का पालन कर रहे है। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई में नयी दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों के विशेषाधिकार वापस लेने समेत कई कदम उठाये।

गिरफ्तारी के बाद, एक दुर्लभ घटना हुई जब एक भारतीय राजनयिक को विदेश में हिरासत में लिया गया जिससे भारत-अमेरिका के रिश्तों में गतिरोध पैदा हो गया। इससे पहले भी, कई विशेषज्ञों ने कहा कि इसमें स्थिरता आ गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस और प्रभावशाली अमेरिकी उद्योग ने भारत की आर्थिक नीतियों पर खुलकर गुस्सा जाहिर किया था। कई पत्रों के जरिये, 240 से अधिक कांग्रेस सदस्यों और सीनेटरों तथा कारपोरेट अमेरिका ने भारत में नीतिगत पंगुता पर गौर करने के लिए ओबामा की मदद मांगी।


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