राजनयिक विवाद: ‘‘ऐसा करना सबसे मूर्खतापूर्ण चीजों में से एक था।’’

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Saturday, January 11, 2014-2:41 PM

वाशिंगटन: राजनयिक विवाद की वजह से भारत-अमेरिका संबंध को हुए नुकसान की बात स्वीकार करते हुए शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व को यह एहसास है कि उन्होंने इस मामले में अपनी ओर से जो कुछ किया वह ‘‘सबसे मूर्खतापूर्ण था’’ और अब उसे संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए ‘‘अतिरिक्त प्रयास’’ करने होंगे।

भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के कल रात राजधानी दिल्ली पहुंचने के साथ ही अमेरिकी सरकार ने एक राहत की सांस ली। अमेरिकी सरकार के अधिकारियों ने दोनों देशों के उस संबंध में आगे बढऩे की अपनी प्रतिबद्धता जताई, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 21वी सदी की ‘‘निर्धारक सांझेदारी’’ बताया था।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा, ‘‘अमेरिका और भारत के बीच व्यापक और गहरी मित्रता है और अकेला मामला हमारे बीच के परस्पर सम्मान वाला संबंध समाप्त होने का संकेत नहीं है।’’ सूत्रों ने कहा कि ओबामा को घटनाक्रम के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाती थी और ऐसा माना जाता है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुजैन राइस के साथ साथ विदेश मंत्री जॉन कैरी भी स्थिति की निगरानी कर रहे थे।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अमेरिका-भारत संबंध में यह स्पष्ट रूप से चुनौती वाला समय है और अमेरिका यह उम्मीद करता है कि यह समाप्त नहीं होगा तथा भारत संबंधों में सुधार लाने और उन्हें ‘‘रचनात्मक स्थिति’’ में वापस लाने के लिए ‘‘सार्थक कदम’’ उठाएगा।’’

ऐसी जानकारी है कि एक शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व ने राजनयिक मामले से भारत-अमेरिका संबंधों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ऐसा करना सबसे मूखतापूर्ण चीजों में से एक था।’’ एक सूत्र ने यहां तक कहा कि शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व की ‘‘नाराजगी भरी प्रतिक्रिया’’ भारत जैसी ही थी। उसका कहना था ‘‘यदि भारतीय नाराज हैं तो हम भी हैं।’’ यह उन कारणों में से एक है, जिनके चलते कैरी ने अपनी विदेश यात्रा के बीच में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद से सम्पर्क किया और चूंकि वह उस समय उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से बात की। सूत्रों ने कहा, ‘‘हमारे तरफ भी मूर्ख लोग हैं। आपकी तरफ भी मूर्ख लोग हैं।’’ ऐसा समझा जाता है कि उन्होंने इस बातचीत के दौरान उस घटना के लिए खेद जताया।

अमेरिकी सरकार के शीर्ष स्तर और सांसदों के बीच होने वाली चर्चा के बारे में जानकारी रखने वाले एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘अधिकतर लोगों की राय यह थी कि ऐसा नहीं होना चाहिए था। नौकरशाहों का एक ऐसा वर्ग था, जिसने एक मुद्दे को पकड़े रखा और बड़े पद पर आसीन लोगों ने या तो चीजों को नजरंदाज किया या वे संक्रमण (परिवर्तन) के बीच में थे। चाहे जिस भी कारण से हो, बड़े पदों पर बैठे लोगों ने नौकरशाहों के एक वर्ग को उस समय नहीं रोका, जब लोगों को यह कहना चाहिए था कि देखिए यह मुद्दा कौन सी दिशा में जा रहा है।’’

सूत्रों ने कहा, ‘‘कांग्रेस और सत्ता के गलियारों में यह कहा जा रहा है कि यह नहीं होना चाहिए था।’’  सूत्रों ने कहा कि मामले को ऐसे लोग संभाल रहे थे, जिनमें इस बात की समझ नहीं थी कि ऐसी कार्रवाई का क्या नतीजे होंगे। जब तक मामला अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में आया, यह न्यायपालिका के अधिकारक्षेत्र में प्रवेश कर चुका था। सूत्रों ने   कहा कि इसके बाद भारत की ओर से कड़े जवाबी कदम ने उनके हाथ बांध दिए।

वाशिंगटन में काफी वरिष्ठ स्तर पर एक भाव यह था कि कोई भी इस समस्या को नहीं चाहता था और इस मामले को बड़े ही खराब तरीके से संभाला गया। सूत्रों ने कहा, ‘‘अब चूंकि यह घटित हो चुका है, हमें इसे सुलझाने की जरूरत है। वहां पर सोच यह है कि हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ऐसी चीजें दोबारा ना हों।’’ ओबामा प्रशासन में कल यह भावना थी कि वे इस घटना को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढऩा चाहेंगे।

गौरतलब है कि भारतीय राजनयिक 39 वर्षीय देवयानी खोबरागड़े को गत वर्ष 12 दिसम्बर को गिरफ्तार किया गया था और कपड़े उतारकर तलाशी लेने के लिए उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखा गया। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच एक गतिरोध उत्पन्न हो गया और भारत ने जवाबी कार्रवाई में अन्य कदमों के साथ ही भारत में अमेरिकी राजनयिकों को मिलने वाली कुछ सुविधाओं में कटौती कर दी। अब खोबरागड़े वापस भारत लौट आ हैं। जब 12 दिसम्बर को यह मामला अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के सामने आया तो उसने बहुत ‘‘नाराजगी’’ जताई थी। देवयानी को वीजा धोखाधड़ी और गलत जानकारी देने के मामले में 12 दिसम्बर को ही गिरफ्तार किया गया था।
 


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