देवयानी विवाद के बाद भारत से संबंध सुधारने में जुटा अमेरिका

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Wednesday, January 15, 2014-1:09 PM

वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक बनाने का काम जारी रखने तथा देवयानी प्रकरण से आगे बढऩे की प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिका के उप विदेश मंत्री विलियम जे बर्न्स ने कल विदेश मंत्रालय के फॉगी बॉटम मुख्यालय में भारत के नए राजदूत एस. जयशंकर के लिए दोपहर का भोज आयोजित किया था, जिस दौरान दोनों के बीच सार्थक बातचीत हुई।

मुलाकात के दौरान दोनों राजनयिकों ने स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, रक्षा, आर्थिक और व्यापार वार्ताओं, आतंकवाद से मुकाबले और असैन्य परमाणु घटनाक्रम के मुद्दे पर भारत-अमेरिका के संयुक्त कार्य को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। इसी सिलसिले में दोनों पक्षों ने विभिन्न मुद्दों पर भविष्य की द्विपक्षीय बैठकों तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए शुरूआती तैयारी पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने बताया, ‘‘उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि बीते कुछ सप्ताह चुनौतीपूर्ण रहे हैं और हम दोनों इसे पीछे छोड़ते हुए, अपने सामने मौजूद विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर सहयोग बहाल करने के लिए आगे कदम बढ़ाने को प्रतिबद्ध हैं।’’ बन्र्स और जयशंकर ने अमेरिकन एंबेसी स्कूल सहित कई कथित मुद्दों पर राजनयिक नोट के माध्यम से विदेश मंत्रालय द्वारा उठाए गए अलग अलग मुद्दों पर भी चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने कहा ‘‘बर्न्स ने कहा कि हम उनकी चिंताओं को बहुत गंभीरता से लेते हैं और समुचित राजनयिक माध्यमों से उनका समाधान करते रहेंगे।’’ बीते सप्ताह पूर्व वाणिज्य उप महादूत देवयानी खोबरागड़े के भारत लौटने के बाद बर्न्स और जयशंकर की यह पहली मुलाकात थी। कल जयशंकर ने प्रतिनिधिसभा के स्पीकर जॉन बोएनर से भी मुलाकात की।

अब तक वह सीनेट में बहुसंख्यक नेता हैरी रीड, खुफिया मामलों पर सीनेट की सलेक्ट कमेटी की अध्यक्ष डियाने फीनस्टीन, सीनेट में इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष सीनेटर मार्क वार्नर और प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेट इलियट एंजल सहित कम से कम 15 शीर्ष अमेरिकी सांसदों से मिल चुके हैं।

समझा जाता है कि इन सभी मुलाकातों में जयशंकर ने प्रस्तावित आव्रजन सुधार पर भारत की चिंताओं को उठाया और यह आश्वासन चाहा कि एच-1बी नियोक्ताओं के साथ सही व्यवहार किया जाएगा। यह भी माना जा रहा है कि जयशंकर ने न्यूयार्क में देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी पर भारत के नजरिए से दूसरे पक्ष को अवगत कराया।

गौरतलब है कि देवयानी को वीजा जालसाजी और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में पिछले माह गिरफ्तार किया गया था। देवयानी खुद पर लगाए गए आरोपों को खारिज करती हैं। उनकी गिरफ्तारी और उनके साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार के कारण दोनों देशों के रिश्तों में गतिरोध आ गया था। देवयानी प्रकरण के बाद भारत सरकार ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत में अमेरिकी राजनयिकों को मिली कुछ राजनयिक छूट वापस ले ली और एक अमेरिकी राजनयिक को भी देश छोड़ कर जाने को कह दिया।


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