'विदेशी कार्यकर्ताओं के मिलने की जगह बन गया है लिटिल इंडिया'

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Tuesday, January 21, 2014-11:38 AM

सिंगापुर: सिंगापुर में भीषण दंगों का गवाह बने लिटिल इंडिया ने स्वाभाविक तौर पर एक ऐसी जगह का रूप ले लिया है, जहां विदेशी कर्मचारी उनकी शारीरिक और भावनात्मक जरूरतें पूरी करने के लिए एकत्र होते हैं। इस बात की जानकारी संसद को देते हुए सिंगापुर के मंत्री ने कहा कि यह स्थान उनके मिलने और आराम करने का मुख्य स्थल बन गया है।

सिंगापुर के कार्यकारी श्रमशक्ति मंत्री तान चुआन-जिन ने संसद में यह बात भारतीय मूल की उन संरचनाओं के बारे में कही, जहां दक्षिण एशिया के लगभग 400 प्रवासी कर्मचारियों में बीते 8 दिसंबर को दंगा हुआ था। यह दंगा एक दुर्घटना के बाद शुरू हुआ था, जिसमें एक भारतीय की मौत हो गई थी।

तान ने कल सदन को बताया, ‘‘विदेशी कार्यकर्ताओं को एक साथ आने के लिए एक जगह चाहिए, जहां वे चंद उपलब्ध घंटों के लिए एकत्र हो सकें, पुराने दोस्तों से मिल सकें, गांव से आई खबर हासिल कर सकें, घर से आया खाना खा सकें और यहां आए अपने दोस्तों व रिश्तेदारों से मिल सकें।’’ तान ने यह भी कहा कि इस बात का कोई आधार नहीं है कि सिंगापुर में विदेशी कर्मचारियों का व्यापक और व्यवस्थागत ढंग से शोषण किया जाता है और यही दंगे का कारण था।

दंगे के आकलन से जुड़े मंत्रालय संबंधी बयान में उन्होंने कहा कि विदेशी कर्मचारियों के साथ नियोक्ताओं और सिंगापुर निवासियों द्वारा मूलत: अच्छा ही सलूक किया जाता है। इन दंगों में 39 पुलिसकर्मी और नागरिक रक्षाकर्मी घायल हो गए थे और 16 पुलिस कारों समेत 25 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।

दंगों में संलिप्तता के लिए 25 भारतीय अदालत में आरोपों का सामना कर रहे हैं, जबकि 56 भारतीय और एक बांग्लादेशी को सड़क पर हुई इस हिंसा के बाद निर्वासित कर दिया गया था। पुलिस ने दक्षिण एशिया के उन 213 कर्मचारियों के लिए परामर्श भी जारी किया है, जो दंगों में या तो निष्क्रिय थे या फिर संयोगवश शामिल थे।

सिंगापुर में विदेशी कर्मचारियों की स्थिति के आकलन के बारे में तान के हवाले से द स्ट्रेट्स टाईम्स ने बताया, ‘‘मुझे लगता है कि विदेशी कर्मचारियों के साथ स्थिति आम तौर पर अच्छी है लेकिन यह पूरी तरह उत्तम नहीं है। सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।’’

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने पिछले साल 7000 विदेशी कर्मचारियों की परेशानियों में उनकी मदद की थी। यह संख्या सिंगापुर के निर्माण या पोत उद्योग में वर्क परमिट पर काम कर रहे 7 लाख विदेशियों की संख्या का एक प्रतिशत मात्र है। विदेशी कर्मचारियों के लिए सहयोग का वादा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे यह समझने में बहुत दिक्कत होती है कि कोई कैसे किसी विदेशी कार्यस्थल पर व्यापक और व्यवस्थागत शोषण का फैसला करके उसकी आलोचना कर सकता है। या फिर यह कह सकता है कि यही दंगों की वजह थी।’’

उन्होंने यह घोषणा भी की कि और ज्यादा मनोरंजक केंद्र खोले जाएंगे, लेकिन ये केंद्र कभी भी लिटिल इंडिया की जगह नहीं लेगा। लिटिल इंडिया में भारतीय मूल के लोगों के उद्यम, खाने की जगहें और पब वगैरह हैं और दक्षिण एशिया से आने वाले लोग यहां अपनी छुट्टी का दिन बिताते हैं।

 


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