अमेरिका के साथ गतिरोध के बीच करजई का समर्थन

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Saturday, February 15, 2014-7:22 PM

कंधार (अफगानिस्तान): अमेरिका और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के बीच जारी गतिरोध के बीच भारत ने युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए ‘‘असाधारण और साहसी’’ प्रयास करने वाले करजई की आज प्रशंसा की। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अफगानिस्तान के पहले कृषि विश्वविद्यालय का यहां उद्घाटन करते हुए करजई का समर्थन किया और गत 12 वर्ष के उनके नेतृत्व की प्रशंसा की।

यहां एक दिवसीय यात्रा पर पहुंचे विदेश मंत्री खुर्शीद ने कहा कि देश में आगामी चुनाव इस तथ्य का प्रमाण है कि लोकतंत्र ने यहां अपनी जड़े मजबूत कर ली हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह चुनाव इस तथ्य का प्रमाण है कि लोकतंत्र ने अपनी जड़े इस देश में मजबूत कर ली हैं। यह आपके गत 12 वर्ष के असाधारण एवं साहसी नेतृत्व के साथ ही जिस तरीके से आपने इस देश में लोकतंत्र के पौधे को सींचा है उसका भी प्रमाण है।’’

खुर्शीद ने कहा, ‘‘भारत की ही तरह आज कोई भी अफगानिस्तान के आगामी चुनाव के परिणाम की संभावना नहीं जता सकता। राष्ट्रपति पद के लिए जो कई उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे वे राजनीतिक और समूहों के बीच लोकतांत्रिक गठबंधनों को प्रतिनिधित्व करते हैं जिनके बारे में कोई भी यह कल्पना नहीं कर सकता कि वे एक दिन एक चुनावी मैदान में सहयोगी बन सकते हैं।’’

उन्होंने यह टिप्पणी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ अफगान नेशनल एग्रीकल्चरल साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी यूनीवर्सिटी (एएनएएसटीयू) का उद्घाटन करते हुए की। यह कृषि विश्वविद्यालय देश में भारत द्वारा समर्थन प्राप्त एक क्षमता निर्माण की बड़ी परियोजना है। इसका निर्माण पूर्ववर्ती तालिबान के मुख्यालय में किया गया। भारत ने इस परियोजना में 80 लाख डालर निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। इस विश्वविद्यालय के काफी हिस्से तैयार हैं जबकि बाकी का निर्माण जारी है।

अफगानिस्तान के लिए भारत का विकास सहायता कार्यक्रम दो अरब डालर का है। भारत क्षेत्रीय देशों में शीर्ष दानकर्ता देश है। खुर्शीद अफगानिस्तान की यात्रा पर ऐसे समय पहुंचे हैं जब करजई और अमेरिका के बीच मनमुटाव के चलते दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय सुरक्षा समझौता खटाई में पड़ गया है जो कि इस वर्ष अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद वहां सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी के लिए जरूरी है।

अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार की अपनी यात्रा के दौरान खुर्शीद ने करजई से मुलाकात भी की। खुर्शीद ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान सरकार के एक असली ‘‘अफगानिस्ता की’’, अफगान नीत और अफगान नियंत्रित सुलह समझौता प्रक्रिया को भारत का समर्थन दिया।

खुर्शीद ने अफगान सरकार के उस प्रस्ताव का स्वागत किया कि सशस्त्र समूहों के लोग हथियार डालकर और संविधान का पालन करते हुए देश की मुख्यधारा में भागीदारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ बहादुर और मजबूत लोग ही शत्रुओं के सामने शांति की पेशकश कर सकते हैं। हम आप के साहसी प्रयासों का समर्थन करते हैं।’’ विदेश मंत्री ने भारत और अफगानिस्तान के समाज की तुलना की तथा दोनों के विविधि स्वरूप हैं।


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