... जब दुनिया में पहली बार हाथी को दी गई एक दर्दनाक मौत

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Friday, February 28, 2014-10:39 AM

लंदन:  हम यकीन से तो नहीं कह सकते कि यह तस्वीर असली है, लेकिन इसके पीछे जो कहानी घटित है, उसे आप भी यकीनन जानना चाहेंगे। यह कहानी ब्रिटिश वेबसाइट 'डेली मेल' ने छापी है।

यह घटना 1916 की है जब चार्ली स्पार्क नाम का एक शख्स सर्कस चलाता था और इस सर्कस का हिस्सा मैरी नाम की एक हथिनी भी थी। सितंबर 1916 में, यह सर्कस किंग्सपोर्ट नाम के एक छोटे शहर पहुंचा। प्रचार के लिए शहर की मुख्य सड़क से सर्कस की परेड निकली।

इसी परेड में 38 साल का वॉल्टर एल्ड्रिज मैरी की सवारी कर रहा था। उसे हाथियों को काबू करने का कोई खास अनुभव नहीं था। उसे बस इतना बताया गया था कि हथिनी के शरीर से भालेनुमा छड़ी को लगाए रखना है, इससे वह काबू में रहेगी। परेड के दौरान मैरी को तरबूज का एक टुकड़ा पड़ा हुआ मिला और वह उसे खाने के लिए रुक गई, जिस कारण एल्ड्रिज ने उसे एक की बजाए कई बार छड़ चुभा दी। मैरी को उसकी यह हरकत पसंद नहीं आई और उसने उसे सूंड से उठाकर नीचे पटक दिया और उसका सिर कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

यह वह समय था जब लोकतंत्र मजबूत नहीं था और भीड़तंत्र ही फैसले लिया करता था। गुस्साई भीड़ ने मैरी को मार डालने की मांग की। सर्कस के मुखिया चार्ली स्पार्क ने बिना विरोध किए यह मांग मान ली, लेकिन उन्होंने तय किया कि वह मैरी के अंत को लोगों के लिए दर्शनीय बनाएंगे।

स्पार्क ने तय किया कि उसे फांसी दी जाएगी। दूसरे शहर एरविन से 100 टन की क्रेन मंगवाई गई। इसका इस्तेमाल आम दिनों में रेलवे कैरेज उठाने के लिए होता था। स्पार्क ने मैरी की फांसी का इंतजाम खुले में करवाया ताकि लोग देखने आ सकें।

मैरी को एक रेल से बांधा गया। उसकी मोटी गर्दन के इर्द-गिर्द चेन बांधी गई। जैसे ही क्रेन ने उसे उठाया, आसमान एक तीखी और क्रूर आवाज से भर गया। उसने एक भयानक चिंहाड़ मारी। उसे पांच फीट ही उठाया जा सका था कि चेन टूट गई थी। ऊंचाई से गिरने से उसके कूल्हे की हड्डियां टूट गईं। रेल से जुड़ी उस जंजीर से मैरी के पांव अब भी बंधे थे।

लेकिन यह दर्दनाक तमाशा अभी खत्म नहीं हुआ था। एक मजबूत चेन मंगवाई गई और मैरी की गर्दन पर बेरहमी से बांध दी गई। उसे फिर उठाया गया और आधे घंटे तक लटकाकर रखा गया। जब तक उसकी मौत नहीं हुई। वहां के लोग मैरी को 'मर्डरस मैरी' यानी हत्यारिन मैरी नाम से जानते थे।

यह भी बताया जाता है कि आज भी एरविन शहर मैरी की फांसी दिए जाने की वजह से जाना जाता है। मैरी की खोज में एक बार एक बड़ी कब्र भी खोदी गई थी, लेकिन उसका कोई सुराग न मिला।

 


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