बृहस्पति जैसे ग्रह पर जलवाष्प का पता लगाएगी नई तकनीक

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Sunday, March 02, 2014-9:10 PM

वाशिंगटन: मंगल ग्रह पर पानी की मौजूदगी की खबरों पर आनंद मनाने के बीच अनुसंधानकर्ता हमारे सौर मंडल से बाहर एक अन्य तारे का चक्कर काटने वाले बृहस्पति के आकार के ग्रह के वातावरण में जलवाष्प का पता लगाने के लिए अब नई तकनीक का सहारा ले रहे हैं। विकसित और अधिक संवेदनशील उपकरणों वाली यह तकनीक अनुसंधानकर्ताओं को यह पता लगाने में मदद करेगी कि हमारे आकाश गंगा में पृथ्वी की तरह जल के साथ कितने ग्रह मौजूद हैं।

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कई अन्य संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं ने सौर मंडल के बाहर के ग्रहों के गैसीय वायुमंडल का विश्लेषण करने के लिए एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। पासडेना स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से प्रथम लेखक अलेक्जेंडर लॉकवुड ने व्याख्या की, ‘‘जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से अपने कक्ष में संक्रमित होता है अथवा गुजरता है तो हम इस घटना से हासिल सूचनाओं का जलवाष्प की उपस्थिति का पता लगाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।’’

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी तरफ यदि ग्रह अपने तारे से पर्याप्त रूप से बहुत दूर स्थित हो तो हम एक ग्रह के वायुमंडल के बारे में इसकी कल्पना के जरिए अध्ययन कर सकते हैं। लॉकवुड और उनके सलाहकार, सृष्टिरसायन एवं ग्रहीय विज्ञान और रसायन शास्त्र के प्रोफेसर ज्योफ्री ब्लैक ने ग्रहीय वायुमंडल में पानी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए अनोखी तकनीक का प्रयोग किया। इन लोगों ने रेडिअल वैलोसिटी (आरवी) तकनीक का प्रयोग किया।


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