‘यूक्रेन के प्रति पुतिन का रवैया न्यायोचित नहीं’

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Monday, March 03, 2014-9:06 PM

न्यूयार्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा यूक्रेन संकट का फायदा उठाते हुए क्रिमिया पर कब्जा करने के निंदक और अपमानजनक रवैये को किसी भी तरह न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। यह बात अमेरिका के एक अग्रणी समाचारपत्र ने कही। न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ को पुतिन से साफ तौर पर कहना चाहिए कि उन्होंने शालीनता की हदें पार कर दी हैं और इसके लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय और आर्थिक संबंधों के स्तर पर भारी कीमत चुकानी होगी।

समाचार पत्र ने यह भी लिखा कि पश्चिमी ताकतों को यूक्रेन सरकार को त्वरित और पर्याप्त सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, क्योंकि बर्खास्त राष्ट्रपति विक्टर यनुकोविच ने सरकारी कोष को खाली कर दिया है। संपादकीय में प्रकाशित लेख के मुताबिक, यूक्रेनी रूसियों के लिए पुतिन के खतरे का दावा बिल्कुल निराधार है। ‘‘रूस के प्रभुत्व वाले औद्योगिक नगरों में हाथापाई की कुछ घटनाएं जरूर हुई थीं, लेकिन रूसी वक्ताओं या रूसी हित से जुड़ी संस्थाओं को कहीं भी किसी तरह धमकाया नहीं गया था, खासकर क्रिमिया में तो बिल्कुल नहीं, जहां रूस का प्रभुत्व है और रूसी संघ का अपना सैन्य शिविर भी है।’’

पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यनुकोविच यह अच्छी तरह जानते थे कि कीव के इंडिपेंडेंस स्क्वायर पर भारी जनसंहार और चोरी का पर्दाफाश होने के बाद यूक्रेन की जनता के गुस्से के आगे वह टिक नहीं पाएंगे, इसलिए वह देश छोड़कर भाग खड़े हुए। संपादकीय के मुताबिक, ‘‘यदि उन्हें लगता कि उनकी थोड़ी भी साख बची है, तो वह देश में रहते और स्थिति का सामना करते।’’

समाचार पत्र आगे लिखता है, ‘‘पुतिन अच्छी तरह जानते हैं कि बर्खास्त राष्ट्रपति का बचाव करने के बहाने से क्रिमिया में रूस का नियंत्रण मजबूत किया जा सकता है। यूक्रेन को नीचा दिखाने के लिए वह रूस के तथाकथित विदेशी विशेषाधिकार का सहारा ले रहे हैं। इससे पहले भी 2008 में वह जॉर्जिया के साथ ऐसा बर्ताव कर चुके हैं।’’

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