मानवाधिकार पर प्रस्ताव की परवाह नहीं: राजपक्षे

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Monday, March 10, 2014-4:09 AM

कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि उनका देश मानवाधिकार के मोर्चे पर आलोचना की परवाह नहीं करता। उन्होंने अपनी सरकार के आलोचकों को ‘अफसाने गढऩे वाला’ करार दिया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, तमिल टाइगरों के साथ तीन दशक तक चली लंबी लड़ाई के दौरान श्रीलंका ने जिन चुनौतियों का सामना किया उसकी याद दिलाते हुए राजपक्षे ने कहा कि पूर्व के संघर्ष वाले क्षेत्र में ‘लोगों का दिल और दिमाग जीतने के लिए’ बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया है। टाइगरों के साथ लड़ाई 2009 में खत्म हुई।

राजपक्षे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में श्रीलंका पर अमेरिका समर्थित प्रस्ताव की ओर इशारा कर रहे थे। राजपक्षे ने शनिवार को जोर देकर कहा कि उनकी विकास रणनीति का उद्देश्य विभिन्न समुदाय के लोगों को एक दूसरे के करीब लाना है। अमेरिका समर्थित प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि श्रीलंका पर्याप्त समन्वय प्रयासों को लागू करने और युद्ध अपराधों की जांच कराने में विफल रहा है। 


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