खुर्शीद ने उच्चतम न्यायालय, चुनाव आयोग की आलोचना की

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Thursday, March 13, 2014-10:29 PM

लंदन: विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावों पर उच्चतम न्यायालय और चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘पेचीदा’ तथा संसद या सरकार के क्षेत्र में दखलंदाजी बताया। खुर्शीद ने दोषी सांसदों को अयोग्य ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘न्यायाधीश द्वारा बनाया गया कानून’ बताया और यह कह कर चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों की खिल्ली उड़ाई कि ‘आपको ऐसा कुछ नहीं करना या कहना चाहिए, जिससे आप चुनाव जीत सकें। आपको चुनाव हारने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करनी चाहिए।

स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएएस) में कल रात ‘भारत में लोकतंत्र की चुनौतियां’ विषय पर बोलते हुए खुर्शीद ने कहा कि चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता दलों के लिए चुनाव जीतना कठिन बना देती है । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘उनसे :चुनाव आयोग से: हाल में हमें निर्देश मिले कि हमारे घोषणा पत्र में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सड़कों के निर्माण की पेशकश नहीं की जाए क्योंकि सड़क बनाने का वादा लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को विकृत करता है ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपको पेयजल की पेशकश भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि उससे निर्णय प्रक्रिया विकृत होती है ।’’ खुर्शीद ने कहा कि उनको जो व्यापक दार्शनिक रूख समझ आता है वह यह है कि ‘‘आपको ऐसा कुछ भी नहीं करना या कहना चाहिए जिससे चुनाव जीता जा सके। आपको चुनाव हारने का प्रयास करना चाहिए। मैंने उनसे गुस्ताखी से कहा कि हमने पांच वर्ष तक चुनाव हारने का प्रयास किया, कृपया हमें 15 दिन दीजिए जिसमें हम कोशिश करें और जीत सकें।’’ उन्होंने आयोग को ‘‘काफी शक्तिशाली एवं अति सम्माननीय’’ बताया जिसने ‘‘हमारी चुनावी प्रक्रिया के कई खराब चीजों का हटाया है ।’’

खुर्शीद ने कहा कि वे केवल तीन हैं और आप उनके खिलाफ अपील नहीं कर सकते। और तीनों निर्णय कर सकते हैं कि चुनाव प्रचार में आप किन शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं... यह अध्ययन करना अपने आप में दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग सार्वजनिक भाषण में कितना हस्तक्षेप कर सकता है। उच्चतम न्यायालय की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक निर्णय ऐसे निकाय को हस्तांतरित किए जा रहा है जो लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं है।’’

खुर्शीद ने कहा, ‘‘भारत में अदालतें ऐसे मुद्दों पर विचार रख रही हैं जो वास्तव में संसद या सरकार के निर्णय करने के विषय हैं। वे कहते हैं कि अगर आप काम नहीं करेंगे और अगर आप इन मुद्दों का समाधान नहीं करेंगे तो हमारे पास उनमें हस्तक्षेप करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’’


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