बाल बच्चेदार पुरूष करते हैं ज्यादा तरक्की

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Wednesday, March 19, 2014-5:09 PM

लंदन: अगर आप सोचते हैं कि आपके बच्चे बस निजी जिंदगी की कोमल भावनाओं से जुड़े हैं तो अभी आपको यह जानकारी नहीं है कि वे सिर्फ दिल के सुकून ही नहीं बल्कि तरक्की का रास्ता भी हैं। बच्चे अपने माता पिता की पूरी जिंदगी और उनकी सोच को एक झटके में बदल देते हैं। उनकी खुशियां, उनका लालन पालन और उनकी सही परवरिश ही माता पिता की जिंदगी का केंद्र बन जाता है।

अगर माता पिता कामकाजी हों तो माना जाता है कि अब उनका मन काम के बजाय अपने बच्चे में लगा रहता है लेकिन यह सही नहीं है। 'डेली मेल' में प्रकाशित सर्वेक्षण रिपोर्ट में इसका खंडन करते हुए बताया गया है कि बाल बच्चेदार लोग अपने काम में ज्यादा ध्यान देते हैं और इसी कारण उनकी ज्यादा तरक्की होती है।

सर्वेक्षण में पाया गया है कि पुरूषों पर इसका ज्यादा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बच्चे के जन्म के बाद पिता को उसके  पालन पोषण की जिम्मेदारी का अहसास होता है और वह काम में अधिक ध्यान देने लगता है। पुरूष अपनी इसी लगन के कारण तरक्की की सीढियां चढऩे लगता है।

सर्वेक्षण में ब्रिटेन के 4600 कर्मचारियों से पूछे गए सवाल के आधार पर यह जाना गया है कि बाल बच्चेदार 74 प्रतिशत पुरूषों को  नौकरी में कम से कम पांच पदोन्नतियां मिलती हैं जबकि बिना बच्चे वाले 65 पुरूषों को ही तरक्की मिलती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बाल बच्चेदार पुरूष किसी भी तरह के अन्य कर्मचारी जैसे बिना बच्चों वाली महिलाएं और पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा तरक्की करते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार घर के प्रति जिम्मेदारी का अहसास पुरूष को अधिक काम करने के लिये प्रेरित करता है जिससे उसकी प्रोफेशनल जिंदगी ज्यादा अच्छी हो जाती है। उनके मुताबिक आस पास के लोग भी बाल बच्चेदार पुरूष से ज्यादा उम्मीद करने लगते हैं और वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए मेहनत करने लगता है।

लेकिन महिलाओं पर बाल बच्चेदार होने का प्रभाव अलग ही दिखता है। अधिकतर कामकाजी महिलायें बच्चों के जन्म के बाद नौकरी छोड़ देती हैं लेकिन जो महिलायें वापस काम पर लौटती हैं उनकी तरक्की भी बहुत तेजी से होती है। बच्चे के जन्म के बाद काम करने वाली महिलाएं दोगुने उत्साह से काम करती हैं और वे अपने बच्चों के लिये एक अच्छा उदाहरण बनना चाहती हैं जिसकी वजह से वे काम पर अधिक ध्यान देने लगती हैं। बाल बच्चेदार 57 प्रतिशत महिलाएं अपनी नौकरी में पांच पदोन्नतियां पाती हैं जबकि बेऔलाद 51प्रतिशत महिलाएं ही तरक्की पाती हैं।


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