छत्तीसगढ़ में बीजेपी की जीत की हैट्रिक आसान नहीं

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Friday, October 18, 2013-3:13 PM

नई दिल्ली/रायपुर: भाजपा के प्रदेश संगठन के साथ राष्ट्रीय संगठन को भी छत्तीसगढ़ में जीत की हैट्रिक अब पहाड़ की तरह दिखने लगी है क्योंकि 2008 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में जीत का ताना-बाना बुनने वाले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सौदान सिंह इस बात चुनाव में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। सौदान सिंह ने मुख्यमंत्री के साथ आए रिश्ते में कड़वाहट के कारण चुनाव से दूरी बना ली है और वे अपना पूरा ध्यान राजस्थान में लगा रहे हैं। वहीं  कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को लेकर बनी रणनीति हो या पार्टी के प्रत्याशी चयन की, इस बार भाजपा का हर दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है।

 

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन के मामले में अपना सर्वश्रेष्ठ निर्णय किया है। भाजपा के लिए रणनीति बनाने में जुटे नेताओं को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के कद्दावर नेता दिलीप सिंह जूदेव की कमी अखर रही है। जूदेव पार्टी के लिये वोट खींचने वाले नेताओं में पहले पायदान पर थे, जो अपने व्यक्तिगत आकर्षण के सहारे पार्टी के लिए वोट जुटाते थे। उनके आक्रामक अंदाज को आज भी कई नेता याद कर रहे हैं।

 

पार्टी के एक आला नेता ने संगठन की खामियों का जिक्र करते हुए बताया कि दस वर्ष से सत्ता में रहने के वजह से कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच संवादहीनता बढ़ी है। इसके कारण कार्यकर्ताओं के बीच भी दरार लम्बी हुई है, परिणामस्वरूप निचले स्तर तक संगठन कमजोर हुआ है। पार्टी के ही एक नेता ने माना कि बीजेपी के लिए छत्तीसगढ़ में जीत की हैट्रिक की डगर इस बार बेहद मुश्किल है और पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस बेहद मुस्तैदी के साथ चुनाव लड़ रही है।

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