कांग्रेस को भी पूरबवालों से लगाव

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Monday, October 21, 2013-1:40 PM

नई दिल्ली, (सतेन्द्र त्रिपाठी): अगर कोरे झूठे वायदे न हुए तो शायद इस बार पूर्वांचल के लोगों को उचित सम्मान मिल ही जाएगा। कांग्रेस पार्टी में पूर्वांचल को लोगों को ज्यादा अहमियद देने की कवायद चल रही है। वैसे पिछला चुनाव देखें तो पूर्वांचल को मात्र दो सीटों पर ही समेट दिया गया था।


वैसे दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से एक पूर्वांचल के सांसद महाबल मिश्रा के पास है। वह इस बार द्वारका सीट अपने बेटे विकास के लिए मांग रहे है। कांग्रेस में पूर्वांचल के टिकटों के एक दर्जन से अधिक दावेदार है। इनमें संगम विहार की लड़ाई तो सबसे दिलचस्प रहती है। यहां पूर्वांचल में बिहार से जुड़े नेता को हार मिली तो यूपी से जुड़े नेता ने जीत हासिल की। दोनों पार्टियों में टिकटों की उपेक्षा को लेकर भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दूबे कहते हैं कि पूर्वांचल के लोगों की संख्या को देखते हुए इस बार उन्हें पर्याप्त संख्या में टिकट मिलने ही चाहिए।


पूर्वांचल से कांग्रेस के टिकट दावेदारों में किराड़ी से एस.के.पुरी, करावल नगर से वैद्यनात, भलस्वा जहांगीरपुरी से जगत सिंह चौहान, मटियाला से पीके मिश्रा, गोकलपुरी से एआर जोशी, रिठाला से प्रदीप पांडे आदि दावेदार है। इनमें संगम विहार सीट से हरीश मिश्रा की जबरदस्त दावेदारी है। उनका दावा इसलिए भी मजबूत माना जा रहा है कि पिछले कई चुनाव में पार्टी ने बिहार के नेताओं पर दांव खेला, लेकिन मुंह की खानी पड़ी। वह वैसे भी वह कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के गढ़ सुलतानपुर से है। इलाके के लोगों को पानी की सप्लाई के लिए उनके पानी के दो निजी टैंकर इलाके में उनकी पहचान है। पिछली बार कांग्रेस ने पूर्व पुलिस अधिकारी आमोद कंठ को चुनाव लड़ाया था। वह बुरी तरह हारे थे।  केवल कांग्रेस ही नहीं भाजपा में भी बिहार के नेता इस सीट पर मैदान नहीं मार पाए। द्वारका सीट पर सांसद महाबल मिश्रा ने अपने बेटे के लिए दावेदारी ठोंक रखी है। दोनों ही पार्टियों का पूर्वांचल को लेकर पिछला इतिहास ज्यादा अच्छा नहीं है।

Edited by:Jeta

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