चीन के हमले के समय गोरखपुर के महत्व का पता चला

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Friday, October 25, 2013-10:51 AM

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का सामरिक महत्व उस समय उभरकर सामने आया जब 26 अक्टूबर 1962 को बिना किसी उत्तेजनात्मक कार्रवाई के पडोसी देश चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। छब्बीस अक्टूबर 1962 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरु द्वारा आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी थी और तत्कालीन रक्षामंत्री को इस्तीफा देना पडा था। हिन्दी चीनी भाई-भाई नारे की आड में की गयी इस कार्रवाई से भारत को बडी सैन्य क्षति का सामना करना पड़ा था लेकिन इसके बाद भारत सरकार को पूरी शिद्दत से यह एहसास हो सका कि भारत को अपनी सैन्य शक्ति को पुनर्गठित करने की नितान्त आवश्यकता है। इसके बाद सैन्य शक्ति को सु²ढ करने के जो प्रयास शुरु हुये उसके परिणामस्वरुप 15 जून 1963 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में वायु सेना केन्द्र स्थापित किया गया। आरम्भ में यह केन्द्र वैम्पायर विमानों के एक स्क्वायड्रन लडाकू विमान के समूह ने यहां से उठानें भरी थी।

आज इस केन्द्र पर दुश्मन के भीतरी क्षेत्र तक पहुंचकर मार करने वाले जगुआर लडाकू विमान के अतिरिक्त एमआई 8 हेलीकाप्टर भी मौजूद हैं। वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी यहां से उड़े विमानों ने दुश्मन के ठिकानों पर सफलतापूवर्क हमला किया और करगिल युद्ध के दौरान भी यहां की उडान इकाइयों ने सक्रिय भूमिका निभायी थी। वर्ष 1998 में पूर्वी उत्तर प्रदेश में आयी प्रलयंकारी बाढ के समय भी इस स्टेशन के कर्मचारियों ने प्रशंसनीय कार्य किया और कई लोगों के जानमाल की रक्षा की थी। गोरखपुर से अन्य महानगरों के लिए हवाई यात्रा शुरु करने की मांग इन दिनों जोरों पर है और इसकी आवश्यकता को देखते हुए हवाई अड्डे के विस्तार का कार्यक्रम है। एयरपोर्ट एथारिटी आफ इण्डिया ने 50 एकड जमीन की मांग की है और गोरखपुर जिले में स्थित कुसम्ही जंगल के पास ही भूमि की तलाश की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार एयरपोर्ट एथारिटी आफ इण्डिया ने वायु सेना स्टेशन गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर कुशीनगर में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी मंजूरी दे रखी है और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव ने यह घोषणा कर दी है कि नवम्बर माह के पहले सप्ताह में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कार्य शुरु कर दिया जायेगा, इसलिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मण्डल के लिए दीपावली के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा एक बडा तोहफा दिया जा रहा है। पचास एकड़ जमीन का मामला पूरा हो गया तो वायुसेना स्टेशन के विस्तार का काम आरम्भ हो सकता है। गोरखपुर मण्डल के कुशीनगर जिले के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेशों के लिए उडानें होंगी तो गोरखपुर एयरफोर्स स्टेशन के विस्तार के बाद घरेलू उडानें यहां से हुआ करेंगी। गोरखपुर से अभी केवल दिल्ली के लिए दो जेट विमानों की हवाई सेवा उपलब्ध है।


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