भडकाऊ भाषण से पहले ही आदेश कैसे दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

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Friday, October 25, 2013-2:20 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि वह नफरत फैलाने वाले भाषण का पूर्वानुमान लगाकर इसे रोकने के लिए पहले से ही कोई आदेश जारी नहीं कर सकता। न्यायालय ने अपनी वैधानिक मजबूरी का हवाला देते हुए कहा कि वह पहले से ही यह तय नहीं कर सकता कि कौन व्यक्ति किस तरह का भाषण देने वाला है। न्यायालय ने कहा कि नफरत फैलाने वाला भाषण देने से किसी को रोकने के लिए वह पहले से ही कोई आदेश नहीं दे सकता।

राजनीतिज्ञों को नफरत फैलाने वाला भाषण देने से रोकने संबंधी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्षस्थ अदालत ने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि हम यह आदेश पारित कर दें कि हत्या नहीं होनी चाहिए तो इस पर अनुपालन कैसे होगा। याचिकाकर्ता की दलील थी कि अनेक शिकायतों के बावजूद इस तरह का पहले भाषण दे चुके राजनीतिज्ञों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आने वाले चुनावों में एक बार फिर नफरत फैलाने वाले भाषणों का सिलसिला चल निकलेगा।

याचिकाकर्ता ने इस मामले में शीर्षस्थ अदालत से आदेश जारी करने का आग्रह किया। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी का भाषण अपमानजनक है तो इसके खिलाफ कानून हैं। उस कानून के दायरे में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन वह आदेश कैसे जारी कर सकता है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को ऐसे किसी भाषण के खिलाफ संबंधित अधिकारी के पास जाए।


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