केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए नदी का रुख बदलने का सुझाव

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Wednesday, October 30, 2013-10:54 AM

नई दिल्ली: केदारनाथ मंदिर को भविष्य में किसी तरह की प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मंदाकिनी नदी का रुख बदलने का सुझाव दे रहा है क्योंकि उस क्षेत्र में नदी की तलहटी गांव की जमीन से ऊंची हो गयी है। जून में आई विनाशकारी बाढ के बाद मंदिर के जीर्णोद्धार का काम एएसआई को सौंपा गया है हालांकि मौसम इसमें लगातार बाधा बना हुआ है । संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमार कटोच ने कहा कि जीर्णोद्धार के साथ ही भविष्य में मंदिर को किसी भी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रखने के भी उपाय किये जायेंगे। कटोच ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘‘हमारी रिपोर्ट के अनुसार केदारनाथ में नदी की तलहटी उंची हो गयी है और ग्रामीण इलाके नीचे हो गये हैं। इसलिये हम नदी (मंदाकिनी) का रूख बदलने का सुझाव दे रहे हैं ताकि भविष्य में मंदिर को किसी प्राकृतिक आपदा की दशा में कोई नुकसान न हो या फिर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) या वन विभाग सलाह देगा कि कैसे इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाये।’’

उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार की समय सीमा तय करने से इनकार करते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण बाहरी हिस्से का काम अगले साल ही शुरू हो सकेगा। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसआई ने हमें रिपोर्ट दी है और हमारा मानना है कि जब तक मंदिर की नींव की स्थिति का पता नहीं चलता, हम बाहर से काम शुरू नहीं कर सकते लिहाजा हमने भीतर से काम शुरू कर दिया है जिसमें मंदिर की सफाई शामिल है। खराब मौसम के कारण काम मुश्किल हो गया है और फिलहाल कोई समय सीमा नहीं दी जा सकती कि यह काम कब पूरा होगा। अगले दो सप्ताह में वैसे भी वहां सबकुछ बंद हो जायेगा।’’ कटोच ने कहा, ‘‘मंदिर की नींव कमजोर हो सकती है क्योंकि वहां काफी तेज बहाव के साथ पानी आया था। हमें भारी काम शुरु करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि नींव कमजोर नहीं हो । इसके लिये हम जीएसआई की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एएसआई काफी एहतियात के साथ काम करेगा और जल्दी काम खत्म करने के लिये आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हमें इंसानी श्रम का ही इस्तेमाल करना होगा और वह भी काफी एहतियात के साथ। मलबा हटाने का काम उत्तराखंड सरकार का है लेकिन हमारी दो टीमें मंदिर के भीतर काम कर रही है और हमने उन्हें मशीनों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है।’’ जीर्णोद्धार के बजट के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘शुरूआती बजट दो करोड़ रूपये था लेकिन विस्तृत रिपोर्ट देने के बाद बाकी बजट दिया जायेगा।’’  बाढ के समय मंदिर की रक्षा करने वाले शिलाखंड (बोल्डर) को स्मारक बनाये जाने की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘इस शिला ने मंदिर को बाढ से बचाया और हम चाहते हैं कि इसे उसी स्थान पर रहने दिया जाये क्योंकि हटाने के लिये विस्फोट करना होगा जो मंदिर को और नुकसान पहुंचा सकता है।’’

भविष्य में केदारनाथ को एएसआई संरक्षित इमारत घोषित करने की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘यह कोशिश पहले की जा चुकी है लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण संभव नहीं हो सका । लेकिन केदारनाथ मंदिर के महत्व को देखते हुए एएसआई ने इसके जीर्णोद्धार की पहल की है।’’


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