कांग्रेस में विकल्प की खोज के लिए मंथन शुरू

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Wednesday, October 30, 2013-12:28 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा ): कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में दिल्ली के जिन एक दर्जन विधायकों को पुन: टिकट दिये जाने का फैसला नहीं लिया गया है, पार्टी ने उनके विकल्प की खोज के लिए मंथन शुरू कर दिया गया है। पार्टी के नेताओं ने यह कदम इसलिए उठाया है, ताकि जिन विधायकों का टिकट कट सकता है, उनकी जगह पर सही उम्मीदवारों के बारे में फैसला जल्दबाजी की बजाए सर्वसम्मति से लिया जा सके। 

 सूत्रों के अनुसार यह कदम इसलिए भी उठाया गया है क्योंकि नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया  4 नवम्बर से शुरू होकर 16 नवम्बर को समाप्त हो जाएगी। इसी दौरान पार्टी के सभी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जानी है। पहले तो जिन विधायकों की जगह नये प्रत्याशी खड़े करने है और दूसरा जिन सीटों पर भाजपा के विधायकों के खिलाफ कांग्रेस को नये चेहरे मैदान में उतारने हैं, अभी उनके बारे में भी निर्णय लिया जाना है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्टी के जिन विधायकों को टिकट देने के बारे में फैसला नहीं लिया गया है, उनकी जगह नये उम्मीदवार खड़े करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जेपी अग्रवाल ने मंगलवार को उस इलाके के जिला और ब्लाक अध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक में पार्टी के उन नेतओं को भी आमंत्रित किया गया, जो गत नगर निगम के सम्पन्न हुए चुनाव में हार गये थे। इस बैठक का मकसद केवल एक ही था कि विधायकों की जगह उतारे जाने वाले नये चेहरों के बारे में पार्टी द्वारा सही तरीके से और पूरी सहमति के साथ निर्णय लिया जा सके। पार्टी के नेता यही चाहते हैं कि सभी उम्मीदवारों के नाम सहमति के साथ तय किये जाएं ताकि कल को किसी को कुछ भी शिकायत करने का मौका नहीं मिले। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया अगले दो-तीन दिन तक चलेगी और उसी दौरान नये उम्मीदवारों के नामों का चयन कर लिया जाएगा। 

यह भी पता चला है कि पार्टी के जिन विधायकों के टिकट कर सकते हैं, उन्हें भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। साथ ही उनसे यह जानने का भी प्रयास किया जाएगा, यदि वह अपनी जगह किसी और को टिकट दिलाना चाहते हैं, तो उनकी राय जानने के बाद उसपर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा। याद रहे कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सभी विधायकों को टिकट दिये जाने के पक्ष में हैं जबकि कई नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी सर्वे में जिन विधायकों के कामकाज की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं आई है, उनकी जगह स्वच्छ छवि व बेदाग उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारना ही ठीक रहेगा। । 

 

Edited by:Jeta
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