आधी आबादी को 10 फीसदी भी नहीं मिल रहा टिकट

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Wednesday, October 30, 2013-5:19 PM

नई दिल्ली: इन दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर  नेताओं में टिकट पाने की होड़ मची है। वहीं  दिल्ली विधानसभा के लिए अब तक चार चुनाव हो चुके हैं लेकिन टिकट वितरण में किसी भी दल ने इस बार भी महिलाओं का ख्याल नहीं रखा। राजनीति में आधी आबादी को उचित प्रतिनिधित्व और प्रोत्साहन  देने की वकालत करने वाली कांग्रेस,भाजपा व बसपा की सरकार भी बीते किसी भी चुनाव में महिलाओं को 10 फीसदी भी टिकट  नहीं दिया।

इस मामले में पिछले कुछ चुनाव का परिणाम देखा जाए तो बसपा के महिला उम्मीदवारों का परिणाम कुछ खास नहीं रहा है। वर्ष 1993 में भाजपा की 4 महिला उम्मीदवारों में से मात्र पूर्णिमा सेठी को जीत हासिल हुई थी। वहीं कांग्रेस की 7 महिला उम्मीदवारों में से कृष्णा तीरथ और ताजदार बाबर विजयी रहीं। जबकी बसपा की दोनों महिला प्रत्याशी चुनाव हार गई थीं।

वहीं 1998 के चुनाव के दौरान  कांग्रेस ने 10 महिला प्रत्याशियों में से 8 शीला दीक्षित, ताजदार बाबर, किरन चौधरी, सुशीला देवी, मीरा भारद्वाज, अंजली राय, दर्शना और कृष्णा तीरथ विजयी हुई थीं। जबकी भाजपा के 5 उम्मीदवारों में से केवल सुषमा स्वराज को जीत हासिल हुई और बसपा की पांचों महिला प्रत्याशी हार गईं थीं।

कांग्रेस के 12 महिला उम्मीदवारों में से शीला दीक्षित, ताजदार बाबर, किरन वालिया, बरखा सिंह, मीरा भारद्वाज, अंजली राय और कृष्णा तीरथ वर्ष 2003  के चुनाव में जीत हासिल कर ली थी। इस वर्ष बसपा ने किसी भी महिला को टिकट ही नहीं दिया था। वहीं भाजपा के सभी 6 महिला उम्मीदवार हार गईं थीं। 2008 के चुनाव में भाजपा के 4 महिलाओं और बसपा के दो महिलाओं को टिकट दिया गया था। लेकिन किसी को जीत नसीब नही हुई थी। जबकी कांग्रेस के 8 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था जिसमें तीनों ने जीत हासिल की थी।


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