उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या के दोषी डॉक्टर को बरी किया

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Saturday, November 02, 2013-12:00 PM

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने नासिक के एक डॉक्टर को संदेह का लाभ देते हुए पत्नी की हत्या के आरोप से बरी कर दिया। न्यायमूर्ति पीवी हरदास की अध्यक्षता वाली पीठ ने संजय अहिरे को एक निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को इस आधार पर पिछले सप्ताह खारिज कर दिया कि पीड़ित ने मृत्यु पूर्व दो विरोधाभासी बयान दिये।
 
नासिक के देओला तालुका के रहने वाले 35 साल के डॉक्टर को वर्ष 2009 में उसकी पत्नी प्रतीक्षा को उसके चरित्र पर संदेह के कारण जलाकर मारने का दोषी ठहराया गया था। हालांकि पीड़ित ने मरने से पहले पुलिस को दो बयान दिये थे। पहले बयान में पीड़ित ने कहा कि स्टोव से अचानक लपटें उठने के कारण आग लगी जबकि पीड़ित के पिता के कहने पर दर्ज हुए दूसरे बयान में उसने अपने पति के संदर्भ में कहा कि उसने आग लगाई। उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रतीक्षा ने मृत्यु पूर्व दो बयान दिये और दोनों एक दूसरे के विरोधाभासी हैं।
 

पीठ ने कहा कि मृत्यु पूर्व दिए गए दो बयानों में से किसी एक को स्वीकार करना दूसरे को झूठा मानने जैसा होगा। मृत्यु पूर्व बयानों में विरोधाभास को देखते हुए, हमारी राय में याचिकाकर्ता संदेह का लाभ लेने का हकदार है। मालेगांव सत्र न्यायालय ने 14 अक्तूबर 2009 को डॉक्टर को उसकी पत्नी की हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया था।
 

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