बॉलीवुड ने किया रेशमा को याद

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Monday, November 04, 2013-2:03 PM

मुंबई: लाहौर में रविवार को हुए दिग्गज पाकिस्तानी लोक गायिका रेशमा के निधन से भारतीय फिल्म जगत शोकाकुल है। उनके निधन पर फिल्म जगत और अन्य क्षेत्र से जुड़ी हस्तियों ने अपनी शोक संवेदनाएं ट्विटर के जरिए व्यक्त कीं।


कबीर बेदी: अभिनेता कबीर बेदी ने इस गायिका द्वारा ‘लंबी जुदाई’ पर दी गई प्रस्तुति को याद किया और लिखा, ‘‘रेशमा द्वारा गीत ‘लंबी जुदाई’ पर दी गई प्रस्तुति की याद में। न भूली जा सकने वाली ‘लंबी जुदाई’।’’

अनुभव सिन्हा: फिल्मकार अनुभव सिन्हा ने लिखा, ‘‘ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें रेशमा, आप हमारे लिए तोहफा थीं।’’

सादिया दहलवी: लेखक और पत्रकार सादिया दहलवी ने ट्वीट किया, ‘‘अभी रेशमाजी के निधन के बारे में सुना। पिछले कई दशकों में उनसे हुई मुलाकात और कई बार सुने उनके गीत याद करती हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले।’’

 

समाचार पत्र डॉन के मुताबिक गायिका लंबे अर्से से गले के कैंसर से जूझ रही थीं और रविवार तड़के लाहौर में अंतिम सांस ली। रेशमा पाकिस्तान की लोक गायिकाओं में सबसे अधिक विख्यात थीं। वह वर्ष 1960 में टेलीविजन पर अवतरित हुईं और पाकिस्तान के साथ-साथ भारतीय फिल्मोद्योग के लिए भी गीत रिकॉर्ड किए।

जोश से भरे हैं रेशमा के गाने

रेशमा अपनी असरदार आवाज में वह कुछ ऐसे जोशीले नगमें छोड़ गईं हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। हिंदी फिल्मों के लिए गए उनके गीतों पर एक नजर :

-चार दिनों दा लंबी जुदाई... (हीरो, 1983)
-मेरे चन परदेसी... (पति, पत्नी और तवायफ, 1990)
-अंखियों ने अंखियों से मिलके... (हीर रांझा, 1992)
-जो फूल यहां पर (हीर रांझा, 1992)
-अश्कां दी गली... (वो तेरा नाम था, 2003)

इसके अलावा रेशमा के गाए ये गैर फिल्में नगमें भी मशहूर हुए :
-दमादम मस्त कलंदर...
-ची ची दा छल्ला...
-हाय ओ रब्बा नईं लगदा दिल मेरा...
-ना दिल देंदी बेदर्दी नूं...
-सुन चरखे दी मीठी मीठी...
-वे मैं चोरी चोरी...
-मैं ठल बिच हूकां...


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