मंगल मिशन : भारत का धरती की कक्षा से बाहर कदम

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Monday, November 04, 2013-11:20 PM

बेंगलुरू: मंगल मिशन के साथ ही भारत दूसरे ग्रह के लिए अभियान चलाने वाला एशिया का पहला देश और दुनिया का चौथा संस्थान बन जाएगा। धरती से करीब 40 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंगल ग्रह के लिए अभियान मंगलवार को शुरू होगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक शीर्ष अधिकारी ने मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) से पहले आईएएनएस से कहा, ‘‘अब तक रूस, अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ही मंगल अभियान चलाया है। भारत दुनिया में चौथा और एशिया में पहला होगा।’’ अभियान चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से शुरू होगा।

इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने यहां आईएएनएस से कहा, ‘‘मंगल को रहने योग्य माना जाता है। कई प्रकार से यह धरती जैसा ही है।’’ धरती के लगभग समान मंगल भी अपनी धुरी पर 24 घंटे 37 मिनट में एक घुर्णन लगाती है। हालांकि धरती जहां 365 दिन में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करती है, वहीं मंगल को इसमें 687 दिन लगते हैं।

इस अभियान पर 450 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि ऑर्बिटर को मंगल की कक्षा में पहुंचने में नौ महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के पास इस अभियान की तैयारी के लिए सिर्फ 15 महीने का वक्त था, क्योंकि अगला अवसर 780 दिन के बाद जनवरी 2016 में ही मिल सकता था।

मंगल की कक्षा में ऑर्बिटर पांच प्रयोग करेगा।  उन्होंने कहा कि अब तक चलाए गए 51 मंगल अभियानों में 21 ही सफल रहे हैं। अंतरिक्ष कार्यक्रम हालांकि 1960 से ही इसरो के अभियानों का हिस्सा रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में पहला बड़ा कदम 2008 में चंद्रयान-1 के साथ रखा गया। चंद्रयान-1 अभियान में ही पहली बार चांद पर पानी का पता चला था। अभी ऑर्बिटर धरती की कक्षा में ही चक्कर लगाएगा। एक दिसंबर को इसे अंतरिक्ष में मंगल की ओर बढ़ाया जाएगा।


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