रेलवे ई-टिकटिंग रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

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Tuesday, November 05, 2013-2:04 PM

नई दिल्ली: अभी हाल ही में भारतीय रेलवे ने निर्देश जारी किया था कि, आरक्षित टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा। रेल टिकट की कालाबाजारी रोकने के लिए यह नियम बना था। ताकि टिकट कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। लेकिन दलालों ने अब इसका भी समाधान निकाल लिया है। अगर आप इन दलालों से कंफर्म ई- टिकट भी लेते हैं तो ये आपको उसी नाम का फर्जी पहचान-पत्र भी बनाकर देते हैं।

आज तड़के दिल्ली पुलिस ने दो भइयों को  गिरफ्तार कर ई-टिकटिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। ये दोनों भाई पिछले कई दिनों से फर्जी नाम से टिकट बुक करा लेते थे। उसके बाद फर्जी वोटर आई कार्ड देकर यात्रियों को दो से तीन गुने दामों पर बेचते थे। ये यात्रियों को उसी नाम से फर्जी वोटर कार्ड भी देते थे, जिस नाम से टिकट बुक कराए जाते थे, ताकि सफर के दौरान टीटीई के मांगने पर उसे दिखा सकें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों भई ज्यादातर बिहार के टिकट ही बुक कराते थे।

एक नवम्बर को ही दिल्ली पुलिस को बदरपुर में रेलवे की ई टिकटिंग के गोरखधंधे की खबर मिली थी। दो पुलिसकर्मियों को नकली ग्राहक बना इनके टिकटिंग के ऑफिस में भेजा गया। दिल्ली से मुजफ्फरपुर बिहार जाने के लिये तीन नवम्बर की रेलवे की टिकट की मांग की गई। ऑफिस में बैठे एक युवक ने तत्काल नकली ग्राहक को उसी दिन की टिकट मुहैया करवा दी। इस टिकट के एवज में दो हजार रुपये वसूले गए, जबकि असल में टिकट की कीमत 1, 177 रुपये है। ये ई- टिकट नितिन कुमार के नाम पर थी।

ई- टिकट उपलब्ध कराने के बाद दोनों भाइयों ने पुलिस कर्मियों को नितिन के नाम का फर्जी वोटर आईकार्ड भी दिया। जिस पर ग्राहक की तस्वीर भी लगा दी गई। बाद में पुलिस टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से हुई पूछताछ में पता चला जैतपुर क्षेत्र निवासी विवेक कुमार पहले कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटर और साईबर कैफे चलाया करता था।

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