अधिकारियों की वजह से ठप रहीं ऑनलाइन सेवाएं

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Friday, November 08, 2013-4:27 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): 4 दिन तक बंद रही नगर निगम की सभी ऑनलाइन सेवाएं निगम अधिकारियों की गलती के कारण ही बंद रही। निगम अधिकारियों ने जान बूझकर टेक महिंद्रा के भुगतान की फाइल को रोके रखा, जिसके चलते टेक महिंद्रा को मजबूरन एक बार फिर लगातार 4 दिन तक सभी ऑनलाइन सेवाओं को बंद करना पड़ा था।

हाईकोर्ट के आदेश पर चालू हुई निगम की ऑनलाइन सेवाओं पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम सदन की बैठक में चर्चा के दौरान यह खुलासा हुआ। सदन की बैठक में अल्पकालिक प्रश्न पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई की जब 3 अक्तूबर को पहली बार टेक महिंद्रा द्वारा ऑनलाइन सेवाओं को बंद किया गया था तभी मेयर ने निगम अधिकारियों और टेक महिंद्रा के साथ मीटिंग कर निर्देश दिया था कि बकाया राशि का भुगतान 24 घंटे के अंदर कर दिया जाए। मेयर के साथ हुई इस हाइलेवल मीटिंग में अधिकारियों ने सहमति जताते हुए भुगतान की बात कही थी, लेकिन 28 दिन तक निगम अधिकारी राशि का भुगतान नहीं कर सके। जिसके चलते टेक महिंद्रा ने सभी ऑनलाइन सेवाओं को एक बार फिर दोबारा से 4 दिन तक बंद कर दिया था।

4 दिन तक बंद रही ऑनलाइन सेवाओं के भुगतान में देरी करने वाले अधिकारियों पर अब निगम कार्रवाई करेगा। सदन की बैठक में चर्चा के दौरान तय किया गया कि जिस भी अधिकारी की गलती की वजह से सेवाएं बंद रही और निगम को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अधिकारी के खिलाफ  सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि ना केवल सेवाएं बंद होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी बल्कि निगम को अतिरिक्त राशि का भी भुगतान करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने अग्रिम राशि के तौर पर 27 करोड़ रुपए जमा कराएं है। यदि अधिकारी पहले ही भुगतान कर देते तो निगम की सेवाएं भी चालू रहती और निगम को अतिरिक्त राशि का भुगतान भी नहीं करना पड़ता।
 

हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला: टेक महिंद्रा, निगम के विवाद का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऑनलाइन सेवाएं बंद करने पर निगम ने टेक महिंद्रा के खिलाफ  कोर्ट में अपील दायर की थी। निगम की याचिका पर कोर्ट ने 13 करोड़ रुपए के भुगतान के साथ ही सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था। साथ ही अग्रिम राशि के तौर पर 27 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा कराएं है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 3 दिसम्बर को होगी। इस बीच यदि दोनों में सहमति होती है तो भी कोर्ट को सूचित करना पड़ेगा।


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