राबड़ी ने की लालू की तस्वीर के साथ छठ पूजा

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Saturday, November 09, 2013-2:27 PM

पटना: उगते सूर्य को आज प्रात दूसरा अर्ध्य देने के साथ ही सूर्य उपासना का महापर्व छठ हर्षोल्लास के बीच आज संपन्न हो गया। पटना के एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर एक कुंड में लोक आस्था के महापर्व छठ के अंतिम दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज प्रात उदीयमान भगवान को अर्ध्य अर्पित किया तथा राज्यवासियों के सुख, शांति और समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने बड़े भाई सतीश कुमार और भाभी गीता देवी से आशीर्वाद लिया तथा अपने पुत्र निंशात कुमार सहित परिवार के अन्य सदस्यों को शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री के बड़े भाई की पत्नी गीता देवी, भांजा सुनिल कुमार सिन्हा उर्फ टुनटुन की पत्नी गीता कुमारी, भांजी विभा कुमारी के साथ उनके परिवार के पांच सदस्यों ने इस बार छठ का व्रत रखा था।

हर साल धूमधाम से छठ व्रत करने वाली बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस बार अपने पति और राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में अपने आवास पर बने एक कुंड में उदीयमान सूर्य को आज प्रात अध्र्य अर्पित किया। पूजा में राबड़ी के साथ साथ उनके पुत्र तेज प्रताप और तेजस्वी पुत्रियां तथा दामाद सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। पूजा में लालू प्रसाद की एक बड़ी तस्वीर वहां लगाई गई थी, जिसमें उन्हें छठ मनाते दिखाया गया है। पटना शहर में गंगा के किनारे सहित राज्य के अन्य भागों में नदियों और तालाबों के किनारे भारी संख्या में छठ व्रतियों द्वारा आज प्रात उदीयमान भगवान भास्कर को अर्ध्य अर्पित किए जाने और छठी मैया की पूजा के साथ चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व संपन्न हो गया।

इससे पूर्व कल शाम विभिन्न नदियों के किनारे अवस्थित विभिन्न घाटों तालाबों के किनारे कृत्रिम रूप से बनाये गये कुंडों में खडे होकर छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्ध्य दिया था। छठ पर्व के चौथे दिन आज पौ फटने से पूर्व ही व्रती और उनके परिजन अपने-अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ पटना के गंगा किनारे स्थित विभिन्न घाटों पर पहुंचे और आधे कमर तक पानी में खडे होकर पूजा सामग्रियों से भरे सूप हाथों में लिए भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ दूसरा अध्र्य दिया। छठ व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्ध्य देने के साथ ही व्रतियों का छत्तीस घंटे का उपवास भी समाप्त हो गया तथा उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया।
 


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