राग बगावत को दबाने की कोशिश तेज

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Wednesday, November 13, 2013-2:52 PM

नई दिल्ली ( ताहिर सिद्दीकी): कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद पार्टी में विरोध के स्वर शुरू होने के आसार बढ़ गए है। उन एक दर्जन विधायकों को पार्टी ने पुन:चुनावी दंगल में उतार दिया है,जिनका स्थानीय कांग्रेसी विरोध कर रहे थे। हालांकि पार्टी की ओर से संभावित राग बगावत को दबाने की कोशिशें तेज हो गई है। इसके चलते मंगलवार को विरोध के स्वर धीमे रहे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता अंदरूनी कलह के सड़क पर आने की आशंका से चिंतित हैं।

करीब एक दर्जन सीटों पर मौजूदा विधायकों को टिकट देने का स्थानीय कांग्रेसी नेता लगातार विरोध कर रहे थे। इसके बावजूद पार्टी ने उनके विरोध को दरकिनार करते हुए एक बार फिर उन्हें टिकट से नवाजा है। यद्यपि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तथा प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने इनकी विधायकों के साथ बैठक कराके नाराजगी दूर करने की कोशिश की।

लेकिन वरिष्ठ नेताओं की यह कोशिश रंग दिखाने में कामयाब नहीं हो सकी है।  कई इलाकों के पार्टी कार्यकत्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय पहुंचकर अपना विरोध जताया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझा-बुझाकर वापस कर दिया। किराड़ी से भी 50 कांग्रेस कार्यकत्र्ता कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और पार्टी के घोषित प्रत्याशी अमित मलिक को बदलने की मांग की।

सूत्रों के मुताबिक कई इलाकों के स्थानीय नेताओं और कार्यकत्ताओं ने वरिष्ठ नेताओं को फोन कर मौजूदा विधायकों को फिर चुनावी दंगल में उतारने का विरोध किया। कईयों ने खुलकर वरिष्ठ नेताओं से कह दिया कि जब तक प्रत्याशी बदला नहीं जाएगा वह इलाके में पार्टी के चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लेंगे। इसमें कुछ ऐसी सीटें भी हैं जहां से अन्य कांग्रेसी नेता मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार देवली, राजेंद्रनगर, शकूरबस्ती,पटेलनगर,मादीपुर,जंगपुरा,ओखला,शाहदरा,घोंडा,गोकलपुर,बाबरपुर व किराड़ी विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी असंतोष है। पार्टी प्रत्याशी मालाराम गंगवाल,राजेश लिलोठिया,डॉ.नरेंद्रनाथ,भीष्म शर्मा, बलजोर सिंह,तरविंदर सिंह मारवाह, आसिफ मोहम्मद खान आदि को लेकर कांग्रेस के अंदर भारी असंतोष है। इनमें कुछ सीटें ऐसी हैं जहां से अन्य नेता अपनी दावेदारी जता रहे थे। आसिफ और मारवाह की सीट पर परवेज हाशमी व फरहाद सूरी अपनी दावेदारी जता रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

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