UP: हडताल से करीब 800 करोड़ का नुक्सान

  • UP: हडताल से करीब 800 करोड़ का नुक्सान
You Are HereNational
Thursday, November 14, 2013-12:31 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार से बातचीत विफल होने के कारण करीब 12 लाख राज्य कर्मचारियों की बेमियादी हडताल जारी है। हडताल की वजह से करीब 800 करोड के राजस्व हानि का अनुमान है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि आज प्रदेश के प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार से कर्मचारी नेताओं की तीन घंटे बात हुई लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल सका। इसलिए हडताल जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से बात करने के लिए प्राधिकृत कुमार ने मांग मानने से इन्कार कर दिया।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और राज्य कर्मचारी महासंघ के साझा मंच, राज्य कर्मचारी अधिकार मंच, ने हडताल का आह्ववान किया है। हडताल की वजह से स्वास्थ्य, सिंचाई, लोकनिर्माण और समाज कल्याण आदि विभागों में कामकाज ठप्प है। मंच के अध्यक्ष मंडल अजय सिंह और हरिकिशोर तिवारी के अनुसार, हडताल के कारण सभी सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप्प है। अपनी मांगों को लेकर सिंचाई विभाग, लखनऊ के जवाहर भवन, इंदिरा भवन समेत कई स्थानों पर अपनी मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने सभाएं की। इन दोनों भवनों में कई विभागों के मुख्यालय हैं। उन्होंने बताया कि हडताल के कारण सभी कार्यालयों में ताले लटके हैं।

सरकार के साथ बातचीत असफ्ल होने पर कर्मचारी संघ हडताल पर जाने को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि अभी आवश्यक सेवाओं को हडताल से अलग रखा गया है लेकिन सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो तीन दिन बाद आवश्यक सेवाओं को भी बंद कर दिया जायेगा। सिंह के अनुसार कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर करने के अलावा सभी विभागों में पदोन्नति के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा आरक्षित करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने तथा केन्द्र सरकार के कर्मचारियों की तरह आवास परिवहन और बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता देने की मांग शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि हडताल में करीब 200 संगठन शामिल हैं और कुछ विभागों के जो एकाद संगठन रह गए हैं वे भी अगले एक दो दिन में हडताल में शामिल हो जायेगें। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने मांगों के संबंध में बातचीत के लिए बुलाथा था लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि जबतक उनकी मांगें नहीं मानी जायेंगी हडताल वापस नहीं होगी। दूसरी ओर सरकार ने कर्मचारियों से हठ छोडकर काम पर वापस लौटने की अपील की है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारियों को बातचीत की मेज पर आना चाहिए।

हडताल से समस्या का हल नहीं निकलेगा। गौरतलब है कि करीब 18 साल बाद उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों ने बेमियादी हडताल की है। इसके पहले छह दिसम्बर 1994 को राज्य कर्मचारियों ने बेमियादी हडताल की थी तो 49 दिन के बाद 23 जनवरी 1995 तक चली थी। उस समय भी प्रदेश में समाजवादी पार्टी(सपा) की सरकार थी।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You