नीतीश अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे, मंत्री सोते रहे

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Wednesday, November 27, 2013-2:40 PM

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का आठवां रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए कहा कि जो भी उपलब्धि है वह उनकी व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रदेश की है। यहां जो सरकार है उसके प्रयत्नों का फल है। पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में आज अपनी सरकार की उपलब्धियों का आठवां रिपोर्ट कार्ड जारी करने के समय नीतीश कुमार से यह पूछे जाने पर कि पिछले एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान की सबसे बड़ी अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि क्या मानते हैं, उन्होंने कहा कि जो भी उपलब्धि है वह उनकी व्यक्तिगत नहीं हैं बल्कि बिहार की है और यहां जो सरकार है उसके प्रयत्नों का फल है।

बताया जा रहा है कि जब नीतीश अपनी सरकार की उपलब्धियों का आठवां रिपोर्ट कार्ड जारी कर रहे थे तब उनकी दाहिनी ओर एक सीट छोड़ कर बैठे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह नींद पर काबू पाने की जद्दोजहद में लगे थे। कैमरे ने उन्हें 40 बार ऐसा करते हुए पकड़ा। उनकी इस हरकत पर साथ बैठे ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने उनकी पीठ पर हाथ मार कर उन्हें उठाने की कोशिश भी की थी। मुख्य सचिव अशोक कुमार सिन्हा भी नीतीश के भाषण के दौरान सोते हुए दिखे। जबकि दर्शक इस पूरे दृश्य को देख कर हंसते रहे। गौरतलब है कि नीतीश कुमार के भाषण के दौरान जम्हाई लेने वाले मंत्री नरेंद्र सिंह इससे पहले पाकिस्तान को अपना छोटा भाई बता कर सुर्खियों में आ चुके हैं। मुख्यमंत्री इसे नजरअंदाज कर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे।

नीतीश ने कहा कि उन्हें न तो किसी व्यक्तिगत उपलब्धि की आकांक्षा या इच्छा है। उन्होंने कहा कि उपलब्धियां तो अनेक हैं पर कोई एक चीज से मन को बहुत सुकुन मिला और वह उन्हें अच्छा लगा वह लडकियों की साइकिल योजना है। उन्होंने कहा कि साईकिल योजना के तहत मिली साईकिल चलाकर गांव-गांव लडकियों का स्कूल जाना वह उन्हें सबसे अधिक संतुष्टि देता है। नीतीश ने कहा कि यह समाज में कोई मामूली परिवर्तन नहीं बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन की शुरूआत मानते हैं।

उन्होंने कहा कि सुशासन का काम जो बिहार की जनता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है उसी के मद्देनजर हमारे सहयोगी और अधिकारी मेहनत और काम करते हैं तथा यह सभी के परिश्रम का फल है। 25 नवंबर 2005 को बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश ने कहा कि उनके सत्ता संभालने के पूर्व बिहार में आधारभूत संरचना का अभाव था और यहा सुशासन के बारे में एक राय नहीं थी जिसके कारण यहां काम नहीं हो पाता है। ऐसे में सारे कामों को शुरू करना और क्रियांन्वित करना यह हमारी सतत कोशिश है और यह बिहार की जनता सहित सबके सहयोग से यह संभव हो पाया है।

बिहार में अपनी सरकार की दूसरी पारी का तीसरा साल पूरा कर चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे आश्वस्त करना चाहते हैं कि किसी भी प्रकार का कोई भी शिथिलता नहीं बरती जाएगी और गति धीमी नहीं पड़ेगी। भाजपा के उस कथन कि राजग शासन काल में पिछले साढे सात साल शामिल रहने के कारण उसका श्रेय उन्हें दिए जाना चाहिए, इस पर नीतीश ने कहा कि यह श्रेय लेने और देने का प्रश्न नहीं है, सरकार निरंतरता में चलती जाती है। पिछले 16 जून को सत्ता से बाहर हो गयी भाजपा की ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा कि अगर कोई अलग हैं तो अपने कारणों से अलग हैं। 

प्रदेश भाजपा पर प्रहार करते हुए नीतीश ने कहा कि उनकी बिहार के प्रति प्रतिबद्धता में कमी हो गई है, जिसके कारण उन्होंने इस प्रदेश के बाहर के कारकों (नरेंद्र मोदी) को अपने उपर हावी होने दिया जिसके कारण वे अब परेशान हैं। उन्होंने कहा कि वे अब उनकी (भाजपा) परेशानियों को बांट नहीं सकते क्योंकि ऐसी परिस्थिति उन्होंने स्वयं पैदा की है, इसलिए वे खुद ही झेलें। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की कमी खलने के बारे में नीतीश ने कहा कि राजनीति में इन सब चीजों के बारे में नहीं

सोचा जाता है। जब घटना एक बार हो गयी तो उनकी पीछे मुड़कर देखने की आदत नहीं है। बिहार में सत्ता से अलग हुई भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि प्रतिदिन जिस प्रकार का माहौल बनाने की कोशिश की जाती है वह उस पर उन्हें प्रतिक्रिया व्यक्त करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जहां तक उनके पहले और दूसरे कार्यकाल का प्रश्न है तो यह निरंतरता है। हम हर दिन काम कर रहे हैं और प्रतिदिन पिछले समय की तुलना में आगे बढ़ रहे हैं।


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