मप्र चुनाव: छिटपुट हिंसा व बहिष्कार के बीच हुआ रिकॉर्डतोड़ मतदान

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Tuesday, November 26, 2013-1:32 PM

भोपाल: मध्यप्रदेश में नई विधानसभा के गठन के लिए सभी 230 सीटों पर सोमवार को शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ। इस दौरान 70 फीसदी मतदाताओं ने अपने मत डाले। कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा हुई और मतदान का बहिष्कार किया गया। राज्य में 230 विधानसभा क्षेत्रों में 2586 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इन उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला आठ दिसंबर को होने वाली मतगणना में सामने आएगा।

 

राज्य के कई इलाकों में देर शाम तक बिजली की रोशनी में भी मतदान का क्रम जारी रहा, इसके चलते मतदान का प्रतिशत और बढऩे की संभावना है। इस बीच राज्य के चंबल इलाके में कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा हुई, जबकि कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने मूलभूत सुविधा के अभाव के विरोध में मतदान का बहिष्कार किया। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जयदीप गोविंद ने सोमवार की शाम संवाददाताओं को बताया,‘‘राज्य में कुछ उपद्रव के बावजूद मतदान शांतिपूर्ण रहा।

 

करीब 70 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। सबसे अधिक मतदान होशंगाबाद में 83.19 प्रतिशत और सबसे कम सतना में 54.44 प्रतिशत दर्ज किया गया।’’ गोविंद ने कहा, ‘‘राज्य में 16 स्थान ऐसे हैं जहां मतदाताओं ने आंशिक अथवा पूर्ण रूप से मतदान का बहिष्कार किया। सड़क, बिजली व पानी सहित अन्य समस्याओं को लेकर रायसेन के उदयपुरा उमरिया के बांधवगढ, रतलाम के आलोट,मरैना के अम्बाह, बैतूल के घोडाडोंगरी, राजगढ़ के नरसिंहगढ, दमोह के पथरिया, दतिया के सेंवढा, भांडेर में कुल 16 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया।’’

 

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार राज्य में 23 स्थानों पर ईवीएम को बदला गया है। इसके अलावा कटनी जिले के बडवारा में चुनाव ड्यूटी कर रहे एक सहायक शिक्षक के.बी. श्रीवास्तव की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई। वहीं मुरैना जिले के सुमावली विधानसभा क्षेत्र में भारी भीड़ जमा होने पर 20 मिनट के लिए मतदान दल ने मतदान केंद्र को बंद कर मतदान को रोके रखा।

 

गोविंद ने बताया, ‘‘मतदान का समय गुजर जाने के बावजूद मतदान कई मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं की कतार लगी होने के कारण रोशनी का इंतजाम कर मतदान कराया जा रहा है। इससे मतदान का प्रतिशत 70 प्रतिशत से बढ़ सकता है।’’ राज्य के मतदान के प्रतिशत पर नजर दौड़ाई जाए तो पहले दो घंटे में 15 प्रतिशत चार घंटे में 12 बजे तक 26 प्रतिशत, दोपहर दो बजे तक 43.36 अपरान्ह चार बजे तक 55.56 प्रतिशत और मतदान का निर्धारित समय खत्म होने तक यह आंकड़ा 70 प्रतिशत को पार कर गया।

 

राज्य में 230 विधानसभा क्षेत्रों में 2586 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। यहां एक चरण में मतदान हुआ। राज्य के चार करोड़ 66 लाख से ज्यादा मतदाताओं में से 70 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान शुरू होने से पहले सभी मतदान केंद्रों में मॉक मतदान किया गया। कई स्थानों पर मतदान का समय शुरू होने से पहले ही मतदाता पहुंचने लगे थे। सुबह के समय ठंड ज्यादा होने के कारण मतदान केंद्रों पर कतारें ज्यादा लंबी नहीं थीं, मगर धूप के साथ गर्मी बढऩे के साथ मतदाताओं के मतदान केंद्रों तक पहुंचने का क्रम बढऩे लगा।

 

राज्य के शहरी इलाकों में अधिकांश मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों लांजी, बैहर व परसवाड़ा में मतदान जहां सुबह 7.00 बजे शुरू हुआ, वहीं शेष 227 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 8.00 बजे मतदान शुरू किया गया। मतदान को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। राज्य पुलिस के साथ अर्धसैनिक सुरक्षा बलों को भी बड़ी संख्या में तैनात किया गया था।

 

वहीं नक्सल प्रभावित बालाघाट व सिंगरौली में हेलीकॉप्टर से निगरानी की गई। राज्य के अन्य राज्यों की सीमा से जुड़े 35 जिलों की सीमाएं इस दौरान सील रहीं। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पत्नी साधना सिंह और बेटे कार्तिकेय के साथ सीहोर के जैत गांव में मतदान किया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में मतदान किया। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने भोजपुर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राधौगढ़ में मतदान किया।

छिटपुट हिंसा के बीच हुआ मतदान


राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार मुरैना और भिंड में चार-चार स्थानों पर उम्मीदवारों के समर्थकों ने गोलीबारी की। इसके अलावा मुरैना के सुमावली विधानसभा क्षेत्र में उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए हवा में गोली चलाना पड़ी। इसके अलावा मुरैना के सुमावली विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम को छीनने पर बीएसएफ के जवानों को गोली चलानी पड़ी। इसमें दो लोगों के घायल होने की सूचना है, मगर उपद्रवी ईवीएम मशीन नहीं ले जा सके।

राज्य में चंबल क्षेत्र के मुरैना व भिंड में कई स्थानों पर हिंसा हुई। भिंड के लहार में ईवीएम मशीन तोड़ी गई, तथा भाजपा-कांग्रेस कार्यकतार्ओं के बीच गोलीबारी भी हुई। इसके अलावा कांग्रेस कार्यकताओं पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कार्यकतार्ओं ने भी गोलीबारी की। अन्य हिंसक घटनाओं में अटेर विधानसभा में पथराव हुआ, जबकि सियावली में भाजपा कार्यकतार्ओं ने बहुजन संघर्ष दल के उम्मीदवार नरोत्तम नरवरिया के साथ मारपीट की।

मुरैना के धसटुआ में भी ईवीएम लूट ली गई। सुमावली में कांग्रेस व बसपा के कार्यकतार्ओं में मारपीट हुई। इसी विधानसभा क्षेत्र के नयापुरा में मतदान केंद्र में घुसने की कोशिश की गई। सिवनी जिले के मालवापुरा में एक मतदान केंद्र पर कब्जा कर लिया गया। कब्जे का आरोप भाजपा के कार्यकतार्ओं पर है।


भाजपा-कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला


राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज इस बार दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। अपनी परंपरागत सीट बुधनी के अलावा वह अपने पुराने संसदीय क्षेत्र विदिशा से भी प्रत्याशी हैं। इसके अलावा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री बाबूलाल गौर भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से किस्मत आजमा रहे हैं।

इसके अलावा भाजपा ने इस बार इंदौर के महू से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विदिशा के सिरोंज से मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, सागर जिले के रहली क्षेत्र से गोपाल भार्गव, ग्वालियर के भितरवार से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा, दतिया से सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा, जयंत मलैया को दमोह, यशोधराराजे सिंधिया को शिवपुरी से उम्मीदवार बनाया है।

वहीं कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचैरी को भोजपुर, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को सीधी जिले के चुरहट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को रीवा के सिरमौर, पूर्व मंत्री के. पी. सिंह को शिवपुरी जिले के पिछोर, यादवेंद्र सिंह को टीकमगढ़, विक्रम सिंह नाती राजा को राजनगर, पूर्व मंत्री मुकेश नायक को पवई, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को पुत्र जयवर्धन सिंह को राधौगढ़ से उम्मीदवार बनाया है।


इन्होंने भी डाला वोट
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए लोग काफी उत्साहित थे। मप्र में रिकार्डतोड़ मतदान हुआ। बुजुर्ग से लेकर दूल्हा भी दुल्हन के घर पहुंचने से पहले मतदान केंद्र पहुंचा और अपने मतदान का उपयोग किया। मतदान केंद्रों में बुजुर्ग लोग जो कि 70-80 और उससे ज्यादा उम्र के भी थे अपने परिवार के सहयोग और अपने आस-पास के लोगों के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और वोट डाला। वहीं एक दूल्हे ने भी पहले  अपने वोट का इस्तेमाल किया और मतदान करने के बाद ही बारात लेकर शादी करवाने के लिए दुल्हन के घर पहुंचा।


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