जेल में राजेश तलवार की नई पहचान होगी कैदी 'नंबर- 9342'

  • जेल में राजेश तलवार की नई पहचान होगी कैदी 'नंबर- 9342'
You Are HereNational
Wednesday, November 27, 2013-11:13 AM

नई दिल्ली: आरुषि-हेमराज मर्डर केस में तलवार दंपति को मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उम्रकैद मिलने के बाद राजेश तलवार और नूपुर तलवार को वापिस गाजियाबाद की डासना जेल भेज दिया गया। जेल जाने के बाद तलवार दंपति को नई पहचान और पता बदल होगा। अब राजेश तलवार-कैदी नंबर- 9342, बैरक नंबर 11 और नूपुर तलवार-कैदी नंबर 9343, बैरक नंबर 13 डासना जेल, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश होंगे।

 

आरुषि-हेमराज हत्याकांड केस में सोमवार को कोर्ट ने दोषी करार दिया था और मंगलवार को तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 14 साल की मासूम आरुषि की हत्या करने के दोषियों के लिए हालांकि सीबीआई ने सजा-ए-मौत की मांग की थी लेकिन एडीशनल सेशन जज श्याम लाल ने इस केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानने से इंकार करते हुए इसे उम्रकैद की सजा का ऐलान किया। गौरतलब है कि आरुषि-हेमराज हत्याकांड केस में मंगलवार शाम 4.30 बजे उम्र कैद की सजा का सुनाने वाले जज साहब 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

 

कोर्ट ने धारा 302 यानि हत्या के जुर्म में सश्रम आजीवन कारावास, धारा 201 यानि सबूत मिटाने और धारा 34 यानि गुनाह करने का साझा इरादा रखने के जुर्म में 5 साल की सजा, धारा 203 यानि पुलिस को गलत जानकारी देने के जुर्म में राजेश तलवार को 1 साल की सजा सुनाई। मंगलवार को सजा पर बहस के दौरान सीबीआई ने कहा कि इस केस में एक बार नहीं बल्कि दो बार हत्या की गई है। सीबीआई ने कहा कि पहले गोल्फ स्टिक से आरुषि और हेमराज को मारा गया और फिर ब्लेड से उनका गला काटा गया।

 

सीबीआई के वकील ने तर्क दिया कि ये हत्या ठंडे दिमाग से की गई है, लिहाजा इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए तलवार दंपति को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। लेकिन बचाव पक्ष के वकील तनवीर मीर ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ सबूत बेहद कमजोर हैं इसीलिए तलवार दंपति के साथ रहम बरता जाना चाहिए।

सभी की दलीलें सुनने के बाद जज ने ये कहा-

-सब जानते हैं कि कई बार हत्याएं बिना किसी वजह या किसी बड़ी वजह के बिना भी कर दी जाती हैं। सिर्फ इस आधार पर कि सीबीआई कत्ल के आरोपी की ऐसी किसी मानसिक स्थिति को सबूत में तबदील नहीं कर सके, ये नहीं कहा जा सकता कि हत्यारे के मन में हत्या के वक्त दरअसल कुछ नहीं था।

-अपराध में इस्तेमाल हथियारों का नहीं मिलना मामले से बरी होने का आधार नहीं हो सकता, जबकि जांच एजेंसी के पास पुख्ता और भरोसेमंद सबूत मौजूद हैं।

-ये गौर करने लायक बात है कि मारे गए दोनों लोगों के सिर और गले पर मिले जख्मों के निशान देखकर ऐसा नहीं लगता है कि वो हथौड़े और चाकू से किए गए वार थे और इसीलिए उनके मिलने का सवाल ही नहीं खड़ा होता।

-गोल्फ स्टिक तो खुद डॉक्टर राजेश तलवार ने पेश की। सर्जिकल ब्लेड का साइज एक पेन के बराबर होता है और उसे आसानी से छिपाया या नष्ट किया जा सकता है। दोहरे हत्याकांड वाली रात आरोपियों के पास पूरा वक्त और मौका था कि वो सर्जिकल ब्लेड और दूसरे अहम सबूतों को छुपा दें या नष्ट कर दें।

-जज ने कहा कि उनका मानना है कि दोनों आरोपी समाज के लिए खतरनाक नहीं हैं और न ही धारा 302 के तहत सजा-ए-मौत इनके लिए उपयुक्त हैं। इसलिए दोनों के लिए उम्रकैद की सजा उचित है। न्याय के हित में ये भी सही है कि डॉक्टर राजेश तलवार को आईपीसी की धारा 203 के तहत एक साल की सामान्य कैद की सजा दी जाए।

 कोर्ट ने तलवार दंपति को उम्रकैद का आधार भी सामने रख दिया।

आदेश में कहा गयाः-

1. आरोपियों ने सर्जिकल ब्लेड गायब किया या नष्ट कर दिया।

2. अपराध के दौरान पहने गए खून से सने कपड़े भी गायब कर दिए गए।

3. पूरे घटनास्थल के साथ छेड़खानी की गई।

4. आरुषि के निजी अंगों की सफाई की गई, शव को कंबल से ढंका गया।

5. हेमराज के शव को कूलर के पैनल से ढंका गया।

6. छत के दरवाजे पर ताला लगाया, चाभी या तो छिपा दी या नष्ट कर दी, चाभी आज तक नहीं मिली।

7. सीढ़ियों पर खून के छींटे साफ किए।

8. हत्या में इस्तेमाल हथियार गोल्फ स्टिक को लॉफ्ट में छिपा दिया।

9. दो गोल्फ स्टिक साफ किए गए।

10. मारे गए दोनों लोगों के फोन छुपा दिए गए या फेंक दिए गए।

ये सारे कृत्य दोनों दोषियों ने किए, ये जानते बूझते कि वो कानून से बचने के लिए अपना गुनाह छिपाने के लिए ये सब कर रहे हैं।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You