कावेरी प्रबंधन बोर्ड पर तीन दिसंबर को होगा विचार

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Wednesday, November 27, 2013-6:30 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड पर अमल सुनिश्चित करने हेतु कावेरी प्रबंधन बोर्ड की स्थापना के तमिलनाडु सरकार के आवेदन पर सुनवाई के लिए आज तैयार हो गया। प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष तमिलनाडु सरकार के वकील ने इस मामले का उल्लेख किया। न्यायालय इस पर तीन दिसंबर को सुनवाई के लिए तैयार हो गया।

तमिलनाडु सरकार ने इस अर्जी में बोर्ड की स्थापना के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार का आरोप है कि कर्नाटक मेकेदातू में पनबिजली स्टेशन का निर्माण करने की योजना बना रहा है और इसके लिए कावेरी नदी पर तीन जलाशय बनाने की योजना है। उच्चतम न्यायालय के कड़े रूख के बाद केन्द्र सरकार ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम अवार्ड की अधिसूचना 20 फरवरी को जारी कर दी थी।

न्यायमूर्ति एन पी सिंह की अध्यक्षता वाले इस न्यायाधिकरण ने सर्वसम्मति से फरवरी, 2007 में अपने अवार्ड में कावेरी बेसिन में 740 टीएमसी जल की उपलब्धता का निर्धारण किया था। इस न्यायाधिकरण का गठन जून 1990 में हुआ था और इसकी कार्यवाही 16 साल से भी अधिक समय तक चली। न्यायाधिकरण ने तमिलनाडु को 419 टीएमसी पानी, कर्नाटक को 270 टीएमसी पानी, केरल को 30 टीएमसी और पुडुचेरी को 7 टीएमसी पानी देने का अवार्ड दिया था।

न्यायाधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण के लिए दस टीएमसी जल सुरक्षित रखा था। यह अधिसूचना जारी होने के बाद कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल नियमन समिति का गठन होना है। इनमें कावेरी घाटी के सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ ही जल विज्ञान और कृषि विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा।


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