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मप्र में भाजपा ने ‘इंडिया शाइनिंग’ के अंदाज में लड़ा विधानसभा चुनाव

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Thursday, November 28, 2013-10:17 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चेहरा आगे रखकर विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान चलाया। भाजपा के चुनाव प्रचार की शैली लोकसभा चुनाव 2004 की ‘इंडिया शाइनिंग’ से काफी मिलती-जुलती है। उस चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का चेहरा भाजपा का चुनावी हथियार था तो विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री चौहान का चेहरा।

 

राज्य में भाजपा पिछले दो चुनाव से लगातार जीत दर्ज करती आ रही है, वह इस सिलसिले को आगे जारी रखना चाहती है, लिहाजा इसके लिए उसने पूरी रणनीति के साथ 2013 का विधानसभा चुनाव लड़ा। मतदान हो चुका है और नतीजों के लिए आठ दिसंबर का इंतजार है। राज्य में आचार संहिता लागू होने के बाद भाजपा के प्रचार अभियान पर नजर दौड़ाई जाए तो उसमें सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री चौहान ही छाए हुए थे।

 

चौहान को भाजपा ने एक विकास पुरुष के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की। प्रचार अभियान के सहारे यह बताया गया कि सड़कों की बदली हालत, बिजली की बढ़ी उपलब्धता से लेकर किसानों, गरीब वर्ग को फायदा मिला है। भाजपा का यह प्रचार अभियान ठीक उसी तरह था, जैसा लोकसभा चुनाव 2004 का था। तब पार्टी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी को चमकते भारत का प्रतीक बताया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री चौहान को सामने रखा।

 

इतना ही नहीं, पार्टी ने आम मतदाता को यह भी बताने की कोशिश की कि वे उम्मीदवार नहीं, चौहान और भाजपा की सरकार को ध्यान में रखकर वोट दें। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी डा. हितेष वाजपेयी का कहना है कि भाजपा का प्रचार पूरी तरह विकास आधारित था, अब तक के विकास से लेकर आगामी दृष्टि को बताने की कोशिश की गई। वहीं, कांग्रेस पूरी तरह आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रही।

 

जहां तक मुख्यमंत्री का चेहरा आगे रखने की बात है, यह इसलिए किया गया क्योंकि मतदाताओं से राज्य में आम आदमी की सरकार चुनने और विकास का क्रम जारी रखने के लिए वोट मांगे गए। भाजपा सुशासन और स्व‘छ सरकार देने के लिए वचनबद्ध है। वहीं, कांग्रेस भाजपा को दोमुंही नीति का प्रतीक करार देती है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि भाजपा हमेशा संगठन को सर्वोपरि बताती रही है, मगर हकीकत मेंं वह व्यक्तिवादी दल है।

 

इसने 2004 में वाजपेयी को आगे किया, फिर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को घोषित कर पार्टी का मुखौटा बनाया, ठीक इसी तरह विधानसभा चुनाव में चौहान को प्रचार का हथियार बनाया। यह बताता है कि भाजपा व्यक्तिवादी पार्टी हो गई है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव बादल सरोज कांग्रेस और भाजपा दोनों पर वास्तविक राजनीति से दूर रहने का आरोप लगाते हैं। उनका कहना है कि दोनों दलों के पास नीति के आधार पर देने के लिए कुछ भी नहीं था।

 

यही कारण है कि भाजपा ने व्यक्तित्व के आधार पर चुनाव लडऩे की कोशिश की। चौहान को चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी की तरह प्रचारित किया गया, मगर चौहान वाजपेयी जैसी हस्ती नहीं हैं। आम आदमी की बात करें तो राज्य के किसी भी हिस्से में चले जाएं कोई भी मतदाता सीधे तौर पर  मुख्यमंत्री चौहान के खिलाफ नहीं है, ठीक इसके उलट लोग अपने क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार से खुश नहीं हैं। बहरहाल, भाजपा का प्रचार अभियान अब से 10 साल पहले के लोकसभा चुनाव प्रचार की याद ताजा करा गया, अब देखना है कि चुनाव नतीजे 2004 जैसे होते हैं या उससे जुदा।

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