भगवा रंग भाएगा बिधूड़ी को?

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Friday, November 29, 2013-12:39 PM

नई दिल्ली( अशोक शर्मा):  हरियाणा सीमा से सटा बदरपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार कांग्रेस और भाजपा की प्रतिष्ठा दॉव पर लगी है। वजह है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने क्षेत्र से बसपा के विधायक रामसिंह नेताजी को पार्टी में शामिल कर प्रत्याशी बनाया है जबकि भाजपा के शीर्ष नेताओं ने पूर्व विधायक व गुर्जर नेता रामबीर सिंह बिधूड़ी को पार्टी में शामिल कर उन्हें चुनावी दंगल में उतारा है।

सच्चाई यह है कि विधानसभा का गठन होने के बाद से आज तक इस सीट से कांग्रेस या भाजपा का प्रत्याशी ने कभी चुनाव नहीं जीता है। लेकिन इस बार चुनाव दोनों दलों के नेताओं की साख का सवाल बना हुआ है। वैसे इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चारों निगम पार्षद पहले बसपा के ही थे, लेकिन रामबीर बिधूड़ी के साथ उनमें से तीन पार्षद कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल हो गये थे। ये हैं मीठापुर से धर्मवीर अवाना, मोलड़बंद से तिम्सी कसाना और बदरपुर से फूलकली नारवाल।

चौथी जैतपुर की पार्षद शिखा शाह बसपा में ही हैं और उनके पति नरसिंह शाह बसपा के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। आप का प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। इस क्षेत्र में करीब दो लाख मतदाता हैं जबकि कुल आबादी करीब चार लाख है। इसके अलावा मोलड़बंद, ताजपुर, मीठापुर, हरिनगर, जैतपुर और बदरपुर कुल छह गांव है और 70 अनधिकृत कालोनियां हैं। एकमात्र गौतमपुरी पुनर्वास कालोनी है।

इतिहास:

1993 में पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में बिधूड़ी जनता दल के टिकट पर, 1998 में रामसिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में, 2003 में फिर से बिधूड़ी जीते, 2008 में बसपा के टिकट पर रामसिंह ने विजय हासिल की थी। समस्या- मुख्य मांग इस इलाके को ओ-जोन की श्रेणी से मुक्त कराने की है, जिसकी वजह से खस्ताहाल के मकानों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।

दूसरी समस्या है बेशक हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार यमुना से तीन सौ मीटर तक की दूरी पर निर्माण नहीं हो सकता, लेकिन नेताओं का आशीर्वाद मिलने पाकर कुछ लोग धड़ल्ले से अवैध निर्माण करवा रहे हैं।


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