चुनाव नतीजों से तय होगी संसद सत्र की दिशा

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Thursday, December 05, 2013-12:52 AM

नई दिल्ली : पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे कल से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र की दशा और दिशा तय करेंगे हालांकि सरकार ने काफी भारी भरकम विधायी कामकाज का एजेंडा सूचीबद्ध किया है ।

जबकि विपक्ष 12 दिन के इस सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रहा है। यह अभी भी अस्पष्ट है कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए विधेयक इस सत्र में आ पाएगा या नहीं लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बारे में सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की है ।

विपक्ष ने सरकार पर चौतरफा हमले की तैयारी की है और ऐसा पहले ही दिन से देखने को मिल सकता है क्योंकि भाजपा और वाम दल महंगाई को लेकर कल लोकसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। तेलंगाना संबंधी विधेयक सरकार के 38 विधेयकों की सूची में नहीं है लेकिन सरकार ने तेलंगाना विधेयक को लेकर प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है ।

एक मंत्री समूह तेलंगाना पर मसौदा विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिसे केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी दी जाएगी। सरकार ने कहा है कि महिला आरक्षण विधेयक और लोकपाल विधेयक उसके एजेंडे में शीर्ष पर हैं । इन दोनों ही विधेयकों को एक सदन पारित कर चुका है और दूसरे सदन में ये लंबित हैं।

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही व्यावहारिक रूप से अगले सोमवार ही शुरू होने की उम्मीद है क्योंकि दो सदस्यों के निधन के कारण दोनों ही सदनों की बैठक कल श्रद्धांजलि देने के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित हो जाएगी। राज्यसभा के मोहन सिंह (सपा) और लोकसभा के मुरारीलाल सिंह (भाजपा) का अंतर-सत्र के दौरान निधन हो गया।

छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढहाये जाने की बरसी है और इससे आम तौर पर संसद की कार्यवाही बाधित रहती है । राज्यसभा में भाजपा के उप नेता रवि शंकर प्रसाद ने पार्टी के वरिष्ठ सांसदों की एक बैठक के बाद यहां संवाददाताओं से कहा कि सत्र कैसे चलेगा, यह काफी कुछ विधानसभा के नतीजों पर निर्भर होगा।
 


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