वर्ष 2011 के दौरे के बारे में बोलीं खार : भारत का रूख अलग था

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Thursday, December 05, 2013-11:26 AM

नई दिल्ली: पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने आज कहा कि वर्ष 2011 में भारत के उनके पहले दौरे का अनुभव ‘‘अलग’’ था और उनके अंदाज को लेकर दिए गए बयानों से वह ‘‘अविचलित’’ रहीं । खार से जब पूछा गया कि उनके अंदाज एवं एक्सेसरीज को लेकर मीडिया में जो खबरें आ रही थीं उससे उन्होंने कैसे निपटा तो उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक प्रक्रिया है और बयानों से मैं अविचलित रही । इस तरह के बयानों से किसी को भी अभिभूत नहीं होना चाहिए ।’’   अपने देश में मीडिया के कवरेज की उन्होंने यहां से तुलना करते हुए कहा कि भारत अलग था । 

तत्कालीन विदेश मंत्री के रूप में यहां आने वाली खार ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां एवं बयान ‘‘पैकेज का हिस्सा’’ हैं और सार्वजनिक एवं राजनीतिक जिंदगी में उनके 12 वर्षों के अनुभव ने उन्हें इस तरह की दकियानूसी चीजों का सामना करने को सिखाया है। उन्होंने यहां ‘एजेंडा आज तक’ में कहा, ‘‘भारत पहुंचने से पहले हमारे उच्चायुक्त सलमान बशीर ने मुझसे कहा कि ‘जैसी हैं वैसी रहिए’। मैं खुश हूं कि मैंने कम से कम शत्रुता बढ़ाने में योगदान नहीं किया ।’’   खार ने कहा कि भारतीय फिल्मों के हाल में पाकिस्तान में प्रतिबंधित करने का मामला ‘‘अदालती प्रक्रिया’’ से जुड़ा है ।

हिना  ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने की जोरदार वकालत करते हुए आज कहा कि भारत और पाकिस्तान को अतीत के बोझ को पीछे छोडऩा चाहिए।  उन्होंने कहा कि वह जमात-उद-दावा प्रमुख और 26 नवंबर के हमले के मुख्य सरगना हाफिज सईद के विचारों से असहमत हैं। खार ने कहा कि मुंबई हमला मामले की जांच में भारत को ऐसे सबूत पेश करना चाहिए जो अदालत में ‘टिक’ सकें। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान और भारत दोनों ने युवाओं के मन में एक-दूसरे के प्रति नफरत पैदा की है। हमें ऐतिहासिक गलतियों का शिकार नहीं होना चाहिए--ऐतिहासिक बोझ से फैसला नहीं करें---:भारत और पाकिस्तान के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए: धैर्य और गंभीरता की जरूरत है।’’ खार ने यहां ‘‘एजेंडा आजतक’’ कार्यक्रम में कहा, ‘‘अगर आप अतीत को भविष्य को तय करने की अनुमति देते हैं---तो यह कठिन हो जाता है।’’ खार ने एक भारतीय नौकरशाह के पूर्व में दिए गए बयान को उद्धृत करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच निर्बाध बातचीत जारी रहनी चाहिए। 

जब खार से हाफिज सईद और दाउद इब्राहिम के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत की तुलना में आतंकवाद की चुनौती का अधिक सामना कर रहा है। खार ने कहा, ‘‘हाफिज सईद को पाकिस्तान में दो बार हिरासत में रखा गया---आप हमें(26 नवंबर हमला मामले में) ऐसे सबूत दें जो अदालत में टिक सकें--और मैं यह भी कहूंगी कि मैं हाफिज सईद से असहमत हूं। उनकी राय पाकिस्तान के लिए अच्छी नहीं है और मैं पूरी ईमानदारी से विश्वास करती हूं कि इस मामले को हल करना पाकिस्तान के हित में होगा।’’  खार से 26 नवंबर के हमले में शामिल आतंकवादियों के आकाओं के आवाज के नमूने देने की भारत की मांग और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा के संस्थापक के बारे में उनकी राय के बारे में सवाल पूछा गया था।




 


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