'इसी सत्र में पास कराएंगे सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल'

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Thursday, December 05, 2013-3:13 PM

नई दिल्ली: साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक विधेयक का नरेंद्र मोदी द्वारा विरोध किए जाने के बीच सरकार और कांग्रेस पार्टी ने आज कहा कि यह विभाजनकारी विधेयक नहीं है और इस विषय पर आमसहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ इस विधेयक को संसद के वर्तमान सत्र में लाने के लिए विचार विमर्श किया जा रहा है । गृह मंत्रालय इस विषय पर अन्य राज्यों के विचार जानने के लिए उनके साथ बातचीत कर रहा है ।’’

मसौदा विधेयक पर अन्य दलों के विचार के बारे में पूछे जाने पर रहमान ने कहा कि इस विधेयक पर असहमति की कोई जरूरत नहीं है। ‘‘ हमारा प्रयास आमसहमति बनाने का है।’’

गुजरात के मुख्यमंत्री के विरोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ शायद वह ऐसा कोई कानून नहीं चाहते हैं । गुजरात में अब तक की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक हिंसा हुई और वे इस पर काबू पाने में असफल रहे । केंद्र का दायित्व है कि वह कानून लाए।’’

उन्होंने कहा कि मोदी वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं। हम इस विषय पर 2005 से ही राज्यों से विचार विमर्श कर रहे हैं। संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि मोदी हर चीज को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं, लोकहित की बात नहीं करते है और विवाद पैदा करते हैं।

शुक्ला ने कहा कि वह राजनीतिक फायदे के लिए इसका विरोध कर रहे हैं। बहरहाल, नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आज पत्र लिख कर सांप्रदायिक हिंसा निरोधक विधेयक का विरोध किया और कहा कि प्रस्तावित विधेयक ‘‘तबाही का नुस्खा’’ है।

मोदी ने विधेयक को राज्यों के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण बताते हुए कहा है कि इस संबंध में आगे कोई कदम उठाने से पहले इस पर राज्य सरकारों, राजनीतिक पार्टियों, पुलिस और सुरक्षा एजेंसी जैसे साझेदारों से व्यापक विचार विमर्श किया जाना चाहिए। मोदी का यह पत्र आज संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत पर सुबह आया है।

विधेयक का विरोध करने पर मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए जदयू के नेता के सी त्यागी ने कहा, ‘‘ मोदी के विधेयक का विरोध करने का कारण स्पष्ट है। गोधरा बाद दंगे के लिए गुजरात सरकार जिम्मेदार थी। मोदी का इसका विरोध करना स्वाभाविक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इस पर चर्चा हो सकती है लेकिन हम उन लोगों को राहत प्रदान करने के पक्ष में नहीं हैं जो दंगों के लिए जिम्मेदार हैं। हमारी पार्टी चाहती है कि इसी सत्र में विधेयक लाया जाए।’’


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